
जानकारी के मुताबिक, सूरजपुर जिले के ग्राम पीढ़ा निवासी रेखा राजवाड़े (24) पति तिलक राजवाड़े 9 महीने की गर्भवती थी। 24 सितंबर बुधवार की रात उसे प्रसव पीड़ा होने लगी तो परिजनों ने एम्बुलेंस की मदद से रात 11 बजे उसे जिला अस्पताल सूरजपुर पहुंचाया। रेखा राजवाड़े को प्रसव कक्ष में ले जाया गया।
मौत के बाद पहुंचे डॉक्टर और नर्स
परिजनों के अनुसार, जिला अस्पताल में प्रसूता को देखने न तो डॉक्टर पहुंचे न नर्स। रेखा राजवाड़े को लेकर आई मितानिन सुगंती राजवाड़े ने बताया कि, प्रसव पीड़ा से तड़प रही प्रसूता को कोई देखने नहीं आया। उसने गार्ड से कहा कि, वे नर्स और डॉक्टर को बुला दें, लेकिन उसने नहीं बुलाया।
रात करीब ढाई बजे रेखा राजवाड़े अचेत हो गई और उसकी सांसें थम गई तो ड्यूटी डॉक्टर, नर्स मौके पर पहुंचे और जांच की। आनन फानन में रेखा राजवाड़े को अंबिकापुर रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में मां और बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
तीन डॉक्टरों की टीम करेगी जांच
इस मामले की जांच के लिए CMHO सूरजपुर डॉ. कपिलदेव पैकरा ने तीन सदस्यीय टीम बनाई है। इसमें शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंक पटेल, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. खेत ज्योति जायसवाल और PGMO डॉ. आशीष स्वराज शामिल हैं। सीएमएचओ ने जांच के पॉइंट तय नहीं किए हैं।
तीन सदस्यीय टीम जांच कर बताएगी कि डॉक्टर हॉस्पिटल में प्रेग्नेंट महिला को देखने क्यों नहीं पहुंचे। ड्यूटी में कौन डॉक्टर और नर्स थे, जो सो रहे थे।
मितानिनों का आरोप-डॉक्टरों का व्यवहार ठीक नहीं
संस्थागत प्रसव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली मितानिनों ने भी जिला अस्पताल पहुंचकर प्रदर्शन किया। मितानिनों का आरोप है कि हॉस्पिटल में प्रेग्नेंसी केस आने पर डॉक्टरों का व्यवहार सही नहीं रहता है। वे मितानिनों के साथ अभद्रता करते हैं। उन्हें डांटकर भगा देते हैं। इस कारण वे परेशान होते हैं, जबकि सुरक्षित प्रसव के लिए वे भूमिका निभा रहे हैं।