
पहला कपड़ा मार्केट गेट से भीतर की ओर से और दूसरा गेट के दूसरे छोर यानी कि मेन रोड की ओर से। जब एक छोर से दुकान बंद हुई, तो व्यापारियों ने बवाल किया। नगर निगम पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया।
निगम के अधिकारियों का यह कहना था कि रोड पर शटर ओपन होने पर ग्राहक मार्केट के भीतर नहीं जाते। बाहर ही गाड़ी पार्क पर कर खरीददारी करते हैं। जिसके चलते जाम लगता है और बाकी लोगों काे परेशानी होती है।
लोगों ने खाली को टॉयलेट बनाया, अब भी लग रहा लंबा जाम
इस मामले को बीते बहुत समय नहीं हुए हैं। दुकान बंद करने के पीछे मूल ये था कि ट्रैफिक का फ्लो बना रहे, सड़क जाम ना हो। लेकिन इसके उलट अब भी बंद दुकानों के सामने ही गाड़ियां पार्क हो रही हैं। कारों की लंबी कतार इन दुकानों के सामने लगी रहती है।
मार्केट में मेल टॉयलेट नहीं
इतना ही नहीं भास्कर की टीम जब ग्राउंड पर पहुंची तो दिखा ये कि खाली पड़ी जगह को लोग अब टॉयलेट के तौर पर इस्तेमाल रहे हैं। मार्केट में मेल डेडिकेटेड टॉयलेट नहीं है। फेस्टिव सीजन चल रहा है, मार्केट में भीड़ लगातार बढ़ रही है। बेढंग तरीके से वाहन पार्किंग रोज पंडरी मार्केट में जाम लग रहा है।
निगम ने सिर्फ दुकानें बंद कराई, व्यवस्था नहीं सुधारी
निगम ने दुकान बंद कराकर खुद को फुर्सत कर लिया। लेकिन व्यवस्था का जायजा लेने कोई नहीं आया। व्यापारियों ने अपने खर्चे पर जरूर नो पार्किंग जोन का बोर्ड सड़कों पर लगाया है। लेकिन ये बोर्ड किसी पार्टी के मेनिफेस्टो की तरह है। जिन पर कभी अमल ही नहीं किया जाता।जब इस इस समस्या पर मीनल मेयर चौबे से सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि जाम होने के चलते आम लोगों की शिकायत पर दुकानें बंद कराई गई थी। इसके बाद वो आगे बढ़ गईं। मैसेज ये था कि उन्होंने अपना काम कर दिया है। अब आगे लोगों की अपनी समझ है।
दुकानदारों ने कहा – दुकान खुलती थीं, तो मार्केट टॉयलेट तो नहीं बना था
आस-पास के दुकानदारों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दुकानें बंद करवा दी गई हैं। इससे कोई समस्या नहीं है। लेकिन मूल समस्या का हल तो हुआ ही नहीं है। दुकानें खुलती थी तो हमने अपने खर्चे पर गार्ड लगाकर रखा था। नो पार्किंग जोन का बोर्ड भी लगाया था।
दुकानदार खुद ही ये ध्यान रखते थे कि उनकी दुकानों से सामने पार्किंग न की जाए। लेकिन जब से सड़क की ओर का शटर बंद हुआ है, लोग घंटों तक पूरी बेफिक्री के 1 किमी तक अपनी कार और गाड़ियां पार्क कर छू-मंतर हो जाते हैं। ई-रिक्शा और ठेले वालों ने इसे अपना अड्डा बना लिया है।