
यह मामला साल 2021 के नगरीय निकाय चुनाव से संबंधित है, जिसमें साधना सिंह ने एक वोट से और अभय सोनी ने पांच वोटों से जीत दर्ज की थी। इन करीबी नतीजों के बाद भाजपा प्रत्याशी जे. ललिता (वार्ड 56) और उपासना साहू (वार्ड 64) ने मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी।
उन्होंने दुर्ग न्यायालय में याचिका दायर कर निर्वाचन को शून्य घोषित करने और मतों की दोबारा गिनती की मांग की थी।
कोर्ट ने रिकाउंटिंग से इनकार किया
पिछले तीन सालों से इस मामले को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, 16 अक्टूबर को आए फैसले में अदालत ने कहा कि पुनर्गणना का आदेश केवल ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने पर ही दिया जा सकता है, न कि केवल आरोपों के आधार पर। न्यायालय ने पाया कि इस मामले में ऐसे कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।
इस फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खुशी व्यक्त की और इसे पारदर्शिता तथा जनता के जनादेश की जीत बताया। वहीं, अदालत ने भाजपा प्रत्याशियों के सभी आरोपों को निराधार करार दिया। न्यायालय के इस आदेश के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि साधना सिंह और अभय सोनी अपनी पार्षद की जिम्मेदारियां पूर्ववत निभाते रहेंगे और मतों की पुनर्गणना नहीं की जाएगी।