
यदि ये सरेंडर कर देते हैं या फिर इनका एनकाउंटर हो जाता है तो बस्तर से नक्सलवाद का सफाया होना तय है। इनके सरेंडर, एनकाउंटर या गिरफ्तारी के बाद बस्तर में नक्सल संगठन को चलाने वाला कोई भी बड़ा लीडर नहीं बचेगा। निचले कैडर्स के कुछ नक्सली बचेंगे, लेकिन नेतृत्व खत्म होने से वे भी हिंसा का रास्ता छोड़ने मजबूर हो जाएंगे। 15 में से 7 एरिया कमेटी बची, डिवीजन भी खत्म
बस्तर IG सुंदरराज पी के मुताबिक बस्तर में नक्सलियों की कुल 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटी सक्रिय थी। माड़ डिवीजन, केशकाल और दरभा डिवीजन में नक्सली लगभग खत्म हो गए हैं। पश्चिम बस्तर डिवीजन में कुछ नक्सली हैं। लेकिन अब 7 एरिया कमेटी में कुछ छिटपुट नक्सली ही बचे हैं। दंडकारण्य इलाके में महज 120 से 150 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय हैं। यदि ये नक्सली खत्म हुए तो नक्सलवाद लगभग खत्म हो जाएगा। देश का सबसे खतरनाक नक्सली हिड़मा 18 नवंबर को मारा गया
देश के सबसे खतरनाक नक्सल कमांडरों में शामिल माड़वी हिड़मा छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मरेडमिल्ली जंगल में 18 नवंबर की सुबह हुए एनकाउंटर में मारा गया। उसकी पत्नी राजे उर्फ रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों को भी ढेर कर दिया गया था। पुलिस ने किए लगातार बड़े एनकाउंटर
पिछले डेढ़ साल में पुलिस नक्सलियों के गढ़ में घुसी। इसी साल अबूझमाड़ में नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर बसवा राजू समेत 27 नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया था।
कर्रेगुट्टा में देश का सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन चलाया गया था। जिसमें 31 नक्सली मारे गए थे।
वहीं पिछले साल अबूझमाड़ के थुलथुली में जवानों ने 38 नक्सलियों का एनकाउंटर किया था।
इसके अलावा अलग-अलग मुठभेड़ों में 10, 15, 20, 25 नक्सली भी एकसाथ मारे गए हैं।
2 करोड़ का इनामी बालाकृष्ण भी मारा गया
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में 3 महीने पहले जवानों ने एनकाउंटर में 2 करोड़ के इनामी नक्सली मोडेम बालकृष्ण को मार गिराया था। 5 राज्यों ने बालाकृष्णा पर 2 करोड़ का इनाम रखा था।