
यह पूरी कानूनी प्रक्रिया परिजनों की सहमति से संपन्न की गई है। संजय गायकवाड़ ने बताया कि उन्होंने मन ही मन देहदान का संकल्प लिया था। उन्होंने यह बात अपने मामा के लड़के मनीष राव पवार को बताई, जिस पर मनीष ने भी सहमति व्यक्त की और देहदान का फॉर्म भर दिया। शरीर को जलाने से कोई फायदा नहीं- संजय
संजय गायकवाड़ ने कहा कि शरीर को जलाने से कोई विशेष लाभ नहीं होता। इसके बजाय, यदि यह मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए उपयोगी हो सके, तो यह एक बेहतर विकल्प है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके इस कदम से अन्य लोग भी देहदान के लिए प्रेरित होंगे।
शरीर किसी जरूरतमंद के काम आ सके- मनीष
मनीष पवार ने अपने उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि मरने के बाद हर किसी को राख ही बनना है। राख बनने से बेहतर है कि शरीर किसी जरूरतमंद के काम आ सके। उन्होंने कहा कि देहदान से जरूरतमंदों को आंख, हृदय और अन्य अंग मिल सकें, तो यह जीवन के लिए बहुत बड़ी बात होगी।