
इस अभियान में गांव की महिलाओं ने अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि नशे के कारण होने वाली घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी और सामाजिक पतन के साथ-साथ बच्चों में बढ़ती नशाखोरी के खिलाफ यह कदम उठाना आवश्यक था। बैठक में लिया गया था फैसला
महिलाओं ने जानकारी दी कि कुछ दिन पहले हुई आमसभा की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि गांव में शराब और गांजा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह भी तय हुआ कि जो भी इस सामाजिक बुराई को बढ़ावा देगा, उसके खिलाफ ग्राम स्तर पर सामूहिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का मानना है कि नशा युवाओं को गलत राह पर ले जाकर पूरे समाज को खोखला कर रहा है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उमरगांव की यह पहल अब आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
नगरी एसडीओपी विपिन रंगारी ने इस नेक कार्य के लिए पूरे गांव के लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी।