
हड़ताल के दौरान स्टूडेंट्स ने डॉक्टरों, मरीजों और कॉलेज स्टाफ की एंट्री पर रोक लगा दी, जिससे अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो गईं। स्थिति को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड में समानता लाई जाए और गर्ल्स हॉस्टल की कमी दूर की जाए।
इधर, धरना प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान स्टूडेंट्स से लंबी बातचीत चली। अधिकारी चाहते थे कि स्टूडेंट्स अपना प्रोटेस्ट खत्म कर दें। लेकिन बातचीत का कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
इसके बाद पुलिस ने बल का प्रयोग करते हुए स्टूडेंट्स को बस में भरकर तूता धरना स्थल छोड़ दिया। हालांकि, हड़ताल के दौरान मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित शिव कुमार महानंद ने बताया कि मेरे पिता का एक्सीडेंट हो गया है, जिसमें उनका बायां जबड़ा टूट गया है। लेकिन छात्रों की हड़ताल के कारण इलाज में परेशानियां हो रही है।