
डिवीजन बेंच ने कहा कि, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थल पर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगरीय निकाय प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने इस मामले में नगर पंचायत खरोरा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को शपथ-पत्र के साथ जवाब पेश करने कहा है।
दरअसल, हाईकोर्ट ने बस स्टैंड की बदहाली पर मीडिया रिपोर्ट्स को स्वत: संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है। पूर्व में हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान नगर पंचायत के सीएमओ को शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने कहा था। वहीं, एडवोकेट प्रगल्भ शर्मा को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा था।
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में मिली भारी अव्यवस्था
कोर्ट कमिश्नर ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की है, जिसमें बताया गया कि बस स्टैंड में यात्रियों के लिए न तो पंखों की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए पानी उपलब्ध है। प्रवेश द्वार पर मवेशियों को रोकने अस्थायी स्टील रेलिंग लगाई गई है।
पुरुष और महिला शौचालय में गंदगी और बदबू है। प्रतीक्षालय में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं, न वाटर कूलर, न ही वाटर डिस्पेंसर उपलब्ध है। बारिश में जलभराव से बचाव के लिए अस्थायी नाली बनाई गई, जिसका बजट अनुमोदन लंबित है।
सीएमओ का जवाब, बजट नहीं, टेंडर प्रक्रिया जारी
इस मामले की सुनवाई के दौरान नगर पंचायत खरोरा के सीएमओ ने जवाब में बताया कि, अस्थायी ड्रेनेज लाइन के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। पंखे लगाने और पीने के पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत है। इस संबंध में पहले ही आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि बजट का बहाना बनाकर सार्वजनिक सुविधा से समझौता नहीं किया जा सकता। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थल पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगरीय निकाय प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसे टाला नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट ने सीएमओ से मांगा नया शपथपत्र
डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में दर्शाई गई सभी कमियों पर नगर पंचायत सीएमओ नया शपथ-पत्र प्रस्तुत करें। जिसमें यह बताएं कि अब तक क्या कार्रवाई की गई और आगे की ठोस योजना क्या है। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।