
जांच में सामने आया है कि संतोष वाधवानी अपने बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड फर्म मेसर्स विजय लक्ष्मी ट्रेड कंपनी का संचालन कर रहा था। इसी फर्म के जरिए बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस जारी किए गए। डेटा एनालिटिक्स से खुला पूरा खेल
DGGI अधिकारियों ने बताया कि ये कार्रवाई खुफिया इनपुट और डेटा एनालिटिक्स के आधार पर की गई। जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट, ई-वे बिल डेटा, अन्य पैसों के लेनदेन का एनालिसिस किया गया। इसके बाद यह साफ हुआ कि आरोपी फर्जी इनवॉइस के जरिए अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट ITC का फायदा उठा रहा था।
CGST एक्ट के तहत गिरफ्तारी
आरोपी के खिलाफ CGST अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत कार्रवाई की गई है और उसे गिरफ्तार किया गया। यह अपराध अधिनियम की धारा 132 के अंतर्गत दंडनीय है। गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को संतोष वाधवानी को रायपुर जिला कोर्ट में पेश किया गया, उसे न्यायिक हिरासत रायपुर सेंट्रल जेल भेजा गया।, टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
DGGI रायपुर जोनल यूनिट ने कहा कि GST चोरी और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग ने कारोबारियों से GST कानूनों का सख्ती से पालन करने की अपील की है और फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
फर्जी इनवॉइस क्या है और इसकी सजा
फर्जी इनवॉइस जारी करना या लेना GST कानून के तहत एक गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें बिना असली सामान बेचे या सेवा दिए कागज़ों में बिल बनाया जाता है, ताकि टैक्स चोरी की जा सके।
GST कानून के अनुसार, इस तरह के मामले में जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। यदि टैक्स चोरी की रकम 5 करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो आरोपी को 5 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा भारी जुर्माना भी लगाया जाता है।
जो चोरी किए गए टैक्स के बराबर या उससे ज्यादा हो सकता है। धारा 122 और 132 के तहत ऐसे मामलों में गैर-जमानती गिरफ्तारी का भी प्रावधान है।