
शुभारंभ समारोह में विशिष्ट अतिथि दंडी स्वामी डॉ. इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज, शंकराचार्य आश्रम रायपुर, राजेश्री महंत श्री रामसुंदर दास जी महाराज, स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, आचार्य स्वामी राकेश जी महाराज, आर्य समाज प्रमुख छत्तीसगढ़, संत कौशलेन्द्र रामजी महाराज, अध्यक्ष राम नाम संत समाज, सारंगढ़, बालयोगेश्वर बालयोगी रामबालक दास जी महाराज, पटेश्वर धाम बालोद, महंत सर्वेश्वर दास जी महाराज, प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय संत समिति, संत परमात्मानन्द जी महाराज, गोरखपुर धाम पेंड्रा, मध्यप्रदेश, संत गोकुल गिरि जी महाराज, लोमस ऋषि आश्रम राजिम, प्रजापिता ब्रह्मकुमार नारायण भाई, प्रजापिता ब्रहमकुमारी हेमा बहन, राजिम, दंडी स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ जी महाराज, चक्रमहामेरुपीठम मुंगेली, महंत नरेन्द्र दास जी महाराज, राष्ट्रीय महामंत्री निर्माेही अखाड़ा, स्वामी विराम देवाचार्य जी महाराज, साध्वी महंत प्रज्ञा भारती जी महाराज जबलपुर, मध्यप्रदेश, महंत उमेशानंद गिरी जी महाराज, सिद्धिविनायक आश्रम राजिम, संत विचार साहेब जी महाराज, कबीर संस्थान गोबरा नवापारा, रायपुर, स्वामी डॉ. राजेश्वरानन्द जी महाराज, सुरेश्वर महादेव पीठ रायपुर, संत युधिष्ठिर लाल जी महाराज, शदाणी दरबार रायपुर, महंत बी.आर. जोशी, सतनाम पंथ, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी पुष्पा बहन, नवापारा गरियाबंद सहित सम्माननीय संत विशिष्टि अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
राजिम कुंभ कल्प में प्रतिदिन शाम 6ः30 बजे महानदी आरती का आयोजन किया जायेगा। इसी तरह सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 4 बजे से एवं संध्या 7 बजे से कार्यक्रम स्थल मुख्य मंच, नया मेला स्थल चौबे बांधा राजिम में होगा। इसी तरह 9 से 11 फरवरी 2026 को संत गुरूशरण जी महाराज (पण्डोखर सरकार) का संत समागम स्थल त्रिवेणी संगम राजिम में सत्संग दरबार आयोजित होगा। कार्यक्रम शाम 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक सत्संग दरबार का आयोजन होगा।
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जिले में दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत दम्पत्ति को प्रदान की गई वित्तीय सहायता
राज्य शासन दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का पहल
गरियाबंद। राज्य शासन द्वारा समाज के कमजोर एवं विशेष आवश्यकता वाले वर्गों के कल्याण के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं का सतत और प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग की दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जिले के एक दिव्यांग दम्पत्ति को लाभान्वित किया गया है।
विकासखण्ड मैनपुर के ग्राम भाठीगढ़ निवासी 30 वर्षीय विजेश्वरी कोमर्रा, जो 65 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांग हैं एवं तहसील छुरा के ग्राम अमलोर निवासी 35 वर्षीय केशर कोमर्रा पति-पत्नि है। दम्पत्ति को योजना के तहत 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई। योजना के प्रावधान के अनुसार पति-पत्नी में से किसी एक या दोनों के दिव्यांग होने पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। स्वीकृत राशि ने दम्पत्ति को उनके दाम्पत्य जीवन को सुदृढ़ आधार देने में मदद की है। प्रोत्साहन ने न केवल आर्थिक संबल प्रदान किया, बल्कि स्वयं के प्रति विश्वास, सम्मान और सामाजिक स्वीकृति को भी मजबूती दी है। दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना राज्य शासन की समावेशी सोच का प्रतीक है, जो दिव्यांगजनों को सशक्त बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।
फोटो – दिव्यांग विवाह
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राजिम में होगा ‘संभागीय सरस मेला का भव्य आयोजन
महिला स्व-सहायता समूहों के उत्कृष्ट उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री, ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
गरियाबंद। राजिम कुंभ (कल्प) 2026 के पावन अवसर पर इस वर्ष भी महिला स्व-सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण और उनके उत्पादों के व्यापक विपणन के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान द्वारा संभागीय सरस मेला 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला 01 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक राजिम मेला मुख्य मंच के सामने, जिला गरियाबंद में आयोजित होगा।
मिशन बिहान द्वारा संचालित यह मेला न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम है, बल्कि छत्तीसगढ़ की परंपरागत कला, संस्कृति, खाद्य उत्पादों और हस्तनिर्मित वस्तुओं को बड़े स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने का भी महत्वपूर्ण मंच है। इस मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा उनके उत्कृष्ट एवं गृह-उद्योग आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की व्यवस्था की गई है, जिनमें हस्तशिल्प, हैंडलूम, कॉस्मेटिक आइटम, पारंपरिक खाद्य सामग्री, मसाले, ऑर्गेनिक उत्पाद, बांस शिल्प, डेकोरेटिव आइटम, रेडीमेड वस्त्र, घरेलू उपयोगी सामग्री सहित अनेक वैरायटी शामिल होंगी। आयोजन से जुड़े विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सरस मेला महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक मजबूत आर्थिक मंच प्रदान करता है। राजिम कुंभ जैसे विशाल आयोजन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही से महिला समूहों को अपने उत्पादों की व्यापक पहचान और बेहतर बिक्री का अवसर मिलता है।