
मकान में चल रहा था निर्माण कार्य तो मिली जानकारी
महिला का आरोप है कि उनके बेटे और उसके दोस्त ने आपसी मिलीभगत से उनकी अनुपस्थिति और बिना जानकारी के उस जमीन और मकान को विभोर गुप्ता नाम के व्यक्ति को फर्जी तरीके से बेच दिया। इस पूरे मामले की जानकारी उन्हें 16 जनवरी 2026 को मिली, जब उन्होंने देखा कि मकान में निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसके बाद इस पूरे मामले की जानकारी हुई।
एक ही संपत्ति को दो लोगों को बेचने लिए एडवांस
17 जनवरी को जब मनोरमा भिवंडे अपने बच्चों के साथ अमलेश्वर स्थित मकान पहुंचीं, तो वहां निर्माण कार्य कर रहे मजदूरों और विभोर गुप्ता से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए। बताया गया कि प्रवीण भिवंडे और पारस प्रसाद केसरी ने 17 लाख रुपए में इकरारनामा कर 5.50 लाख रुपए कैश एडवांस लिए हैं। एडवांस की राशि निकालने मां को दिया झांसा
पीड़िता का कहना है कि 7.50 लाख रुपए उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में आए थे, जिसे बेटे ने यह कहकर निकलवा लिया कि यह किसी मित्र की रकम है और इसमें से उन्हें कमीशन मिलेगा। बाद में उन्हें समझ आया कि यह रकम संपत्ति के सौदे से जुड़ी थी।
दो फर्जी इकरारनामा भी बनवाए
महिला ने आरोप लगाया कि, उनके नाम से दो फर्जी इकरारनामा और एक पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई है, जबकि उन्होंने किसी भी नोटरी के सामने हस्ताक्षर नहीं किए और न ही किसी प्रकार की रकम प्राप्त की।
पीड़िता ने पुलिस से भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।