
राजिम कुंभ कल्प की अपनी एक अलग पहचान है। यह पैरी, सोंढूर और महानदी के त्रिवेणी संगम स्थल पर आयोजित होता है। त्रिवेणी संगम के एक तट पर भगवान विष्णु श्री राजीवलोचन के रूप में विराजमान हैं, जबकि दूसरे तट पर सप्तऋषियों में से एक लोमश ऋषि का आश्रम विद्यमान है। संगम के बीचों-बीच स्वयं महादेव कुलेश्वरनाथ के रूप में स्थापित हैं।
वैसे तो सालभर श्रद्धालुओं का यहां पहुंचने का सिलसिला लगा रहता है, लेकिन राजिम कुंभ मेले के दौरान उनकी संख्या कई गुना बढ़ जाती है। राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ जी के मंदिर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ता है। आस्था के साथ ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता से यह कुंभ कल्प अलौकिक माना जाता है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
राजिम कुंभ में मेला स्थल बदल गया है। पुराने स्थल से 2 किमी दूरी पर 54 एकड़ वृहद स्थान पर नया मेला स्थल बनाया गया है। ऐसे में मेला में भीड़ भरने और सुरक्षा को लेकर प्रशाशन के समक्ष बड़ी चुनौती बन गई है। इस बार पुलिस प्रशासन ने अलग-अलग क्षेत्र में 4 कंट्रोल रूम बनाया हुआ है। मेला और मंदिर क्षेत्र को 200 से ज्यादा सीसी कैमरों से सर्विलांस में लिया गया है।
गरियाबंद के अलावा सीमावर्ती अन्य जिलों से भी बल बुलाकर 1100 जवानों की तैनाती की गई है। प्रशिक्षित गोताखोर, फायर सेफ्टी गाड के अलावा सादी वर्दी में चप्पे चप्पे पर जवान तैनात रहेंगे। जिससे लूट या अनहोनी का शिकार श्रद्धालु न हो सके।
यातायात सुगम हो इसके लिए 5 से ज्यादा स्थानों पर पार्किंग बनाया गया है। वीआईपी मोमेंट के समय नवापारा राजिम हाइवे जाम न हो इसके लिए वीआईपी मूवमेंट के लिए एक नया रास्ता बनाया गया है जो मेला स्थल तक जाएगा।