
तेलंगाना पुलिस के मुताबिक, देवजी और संग्राम दोनों छत्तीसगढ़ में मोस्ट वांटेड नक्सली थे। देवजी बस्तर के 131 से ज्यादा जवानों का हत्यारा है। ताड़मेटला-रानीबोदली अटैक का मास्टरमाइंड है। देवजी के बाद रमन्ना और बेसरा के सरेंडर या एनकाउंटर से छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। अब बस्तर में सिर्फ 200 नक्सली ही बचे हैं। 40 साल से नक्सली संगठन से जुड़ा
बता दें कि देवजी (65) तेलंगाना के जगतियाल जिले का रहने वाला है। वह इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान वे कट्टरपंथी छात्र संघ (आरएसयू) से जुड़ा था। 1983-1984 के दौरान वह गढ़चिरोली दलम में दलम सदस्य बना। तब से वह नक्सली संगठन के लिए काम कर रहा था। उसका आत्मसमर्पण संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में चल रहा अभियान
गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया था कि, कर्रेगुट्टा में अभियान चल रहा है। अभी तक 89 आईईडी बरामद हो चुकी है। बताया जा रहा है इस अभियान के तहत बाकी बचे नक्सलियों को आखिरी मौका दिया गया है कि वे मुख्य धारा में वापस लौट आए।
17 फरवरी को CRPF के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा हिल्स पर KGH 2 लॉन्च किया है। इसके तहत पुलिस शेष बचे नक्सली लीडर मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और राजी रेड्डी समेत 300 नक्सलियों की तलाश कर रही है।