
घटना के दिन वीरेंद्र ने सूरज से उधार पैसे मांगे, इसी बात पर विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि सूरज राठिया ने कुल्हाड़ी और लकड़ी के पटरे से हमला कर वीरेंद्र को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था, उसी दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। फरार आरोपी सूरज राठिया अपने क्वार्टर में सामान लेने लौटा, उसी समय पुलिस ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने पैसों के विवाद में हमला करने की बात स्वीकार की।
जरूरी सबूत कोर्ट में पेश किए गए
मामले की प्रारंभिक जांच तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश मिश्रा ने की। आगे की जांच सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार ने पूरी की। जांच अधिकारी ने वैज्ञानिक साक्ष्य, घटनास्थल से मिले प्रमाण, एफएसएल रिपोर्ट, गवाहों के बयान न्यायालय में पेश किए।
आरोपी को आजीवन कारावास की सजा
अभियोजन पक्ष ने मामले में कुल 22 साक्षियों के बयान पेश किए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को आजीवन कारावास तथा 100 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में शासन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक वंदना केसरवानी ने पैरवी की।