
दिल्ली में बैठे तस्कर फोन पर ऑर्डर लेते थे और रायपुर में मौजूद अपने गुर्गों को सक्रिय करते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि ये आरोपी मोबाइल टैक्सी और रेपिडो राइडर के तौर पर काम करते थे। इसी पेशे की आड़ में वे शहर के विभिन्न हिस्सों में बिना किसी संदेह के ड्रग्स की सप्लाई कर रहे थे। बिना आमने-सामने आए ‘डेड ड्रॉप’ डिलीवरी
पुलिस के अनुसार, ये तस्कर सीधे हाथों में ड्रग्स देने के बजाय ‘डेड ड्रॉप’ पद्धति का उपयोग करते थे। ऑर्डर मिलने के बाद आरोपी किसी सुनसान या सार्वजनिक स्थान पर ड्रग्स छुपा देते थे।
फिर ग्राहक को उसकी लाइव लोकेशन या वीडियो भेज देते थे। इस तकनीक की वजह से वे लंबे समय तक पुलिस की नजरों से बचे रहे। इतना ही नहीं, संदेह कम करने के लिए कई बार नाबालिगों के जरिए भी पैकेट पहुंचवाए जाते थे।
बाहरी राज्यों से छत्तीसगढ़ पहुंच रहा नशा
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि ड्रग्स की खेप पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई और गोवा जैसे राज्यों से ट्रेन, बस और कुरियर के माध्यम से मंगवाई जाती थी।
पुलिस अब इन आरोपियों के मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि इस नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सके। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय ड्रग्स चेन को बड़ा झटका लगा है और जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।