
जानकारी के मुताबिक, ग्राम सरनापारा में रहने वाले पैत्रुस कुजूर ने 30 अप्रैल को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 29 अप्रैल की सुबह वह अपने ड्राइवर के साथ अपनी एक्सीडेंट हुई गाड़ी ठीक कराने अंबिकापुर गया था। उस समय उसकी पत्नी ललिता कुजूर घर पर अकेली थी।
दोपहर करीब 1 बजे उसकी पत्नी ने कॉल कर पूछा कि वह घर कब आएंगे, तो उसने बताया कि वह अंबिकापुर से निकल रहा है। इसके बाद जब वह दोपहर करीब 3:30 बजे अपने ड्राइवर के साथ घर पहुंचा, तो उसकी पत्नी घर पर नहीं थी। घर का सामान फैला हुआ था और कुछ स्थानों पर खून भी गिरा था।
उसने आसपास और परिचितों के घर पत्नी की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। तभी करीब 3:50 बजे पत्नी के मोबाइल से उसे कॉल आया। कॉल पर एक अज्ञात व्यक्ति ने कहा कि अगर अपनी पत्नी को वापस चाहते हो तो 22 लाख रुपए दो, नहीं तो वह तुम्हें नहीं मिलेगी। इसके बाद ललिता कुजूर का फोन बंद हो गया। अगवा महिला की तलाश के लिए 3 टीम गठित
मामले की जानकारी मिलते ही डीआईजी और एसएसपी सूरजपुर प्रशांत कुमार ठाकुर ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत अगवा महिला को ढूंढने और आरोपियों को पकड़ने के लिए 3 पुलिस टीम बनाई। पुलिस टीमों ने मौके पर जाकर जांच की और आसपास के इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया।
इसी दौरान पुलिस को पैत्रुस कुजूर के पहले काम कर चुके ड्राइवर रौशन देवांगन (21) पर संदेह हुआ। पुलिस ने उसे ग्राम मानपुर से पकड़कर पूछताछ की तो उसने माना कि वह ललिता के अपहरण में शामिल था।
ड्राइवर ने रची अपहरण की साजिश, फिरौती के लिए किया किडनैप
पूछताछ में उसने बताया कि वह पहले करीब 18 महीने तक पैत्रुस की गाड़ी चलाता था। इसलिए उसे पता था कि पैत्रुस एसईसीएल से रिटायर हुआ है और उसे काफी पैसा मिला है। पैसे के लालच में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर किडनैपिंग की योजना बनाई।