
संगठन के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी हालिया आंकड़ों में 33 में से 29 जिलों में 50% से अधिक सीटें खाली रहना आंदोलन की सफलता को दर्शाता है। हाईकोर्ट में लंबित है मामला
संगठन ने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने को लेकर याचिका दायर की थी। याचिका क्रमांक WPC 4988/2025 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 19 सितंबर 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग को छह महीने के भीतर संगठन की रिप्रेजेंटेशन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
संगठन का आरोप है कि आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई, जिसमें स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी को हाईकोर्ट से नोटिस जारी हुआ है।
एंट्री क्लास बदलने पर भी विरोध
संगठन ने कहा कि आंदोलन अब केवल प्रतिपूर्ति राशि तक सीमित नहीं है। इस वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग ने कई स्कूलों में RTE की एंट्री क्लास बदलकर पहली कक्षा कर दी है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि इससे वंचित परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है।
संगठन की ओर से दायर याचिका क्रमांक 414/2026 अभी हाईकोर्ट में लंबित है। उनका दावा है कि पहले हर साल करीब 65 हजार विद्यार्थियों को प्रवेश मिलता था, जबकि इस बार रिक्त सीटों की संख्या करीब 22 हजार रह गई है।