
*शिक्षक दिवस पर समर्पण को सलाम
पूरन मेश्राम/मैनपुर। शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा में बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं होता,बल्कि विद्यालय को अपना परिवार मानकर उसकी हर जरूरत का ध्यान रखना भी एक सच्चे शिक्षक की पहचान है। इसी भावना को चरितार्थ कर रहे हैं। शासकीय आदर्श प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला देहारगुड़ा के कर्तव्यनिष्ठ प्रधान पाठक श्री चित्रसेन पटेल।बीते दिनों कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवकाश के दिन जब सभी विद्यालय बंद थे और लोग अपने घरों में त्योहार मना रहे थे, तब प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल कंधे पर स्प्रेयर टांगकर विद्यालय पहुँच गए।उन्होंने विद्यालय परिसर में बच्चों द्वारा लगाए गए विभिन्न प्रकार के फूल-पौधों और फुलवारी की बारीकी से जांच की। पौधों में कीट लगने की आशंका को देखते हुए उन्होंने पूरे गार्डन में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया, ताकि हरियाली सुरक्षित रह सके। इसके साथ ही विद्यालय के खेल मैदान में उग आई अनावश्यक घास-फूस एवं खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए सर्वनाशक दवा का छिड़काव भी स्वयं अपने हाथों से किया।
*विद्यालय को मानते हैं परिवार*
प्रधान पाठक पटेल का मानना है कि विद्यालय का सुंदर, स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण बच्चों के सीखने की क्षमता और व्यक्तित्व विकास पर सीधा असर डालता है। यही कारण है कि वे शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ स्वच्छता, बागवानी और अनुशासन को भी उतना ही महत्व देते हैं।उनकी यह कार्यशैली देहारगुड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे मैनपुर विकासखंड के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
*शिक्षक दिवस पर समर्पण को सलाम*
शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल की यह पहल यह संदेश देती है कि सच्चा शिक्षक वह है, जो विद्यालय की चारदीवारी के भीतर ही नहीं, बल्कि उसके हर कोने में अपने दायित्व की अनुभूति करता है।
बच्चों को शिक्षा देने के साथ विद्यालय को संवारने का यह जुनून ही एक कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक की असली पहचान है। ऐसे शिक्षक को शिक्षक दिवस पर शत-शत नमन।