पूरन मेश्राम/मैनपुर। गरियाबंद जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर राजापड़ाव क्षेत्र का भदरीपारा गांँव आज भी 1947 के दौर में जी रहा है। ग्राम पंचायत कोचेंगा के आश्रित ग्राम भदरीपारा में 27 मकान और 125 आबादी है, लेकिन गांव में आज तक बिजली का खंभा नहीं पहुंँचा।
शासन ने अंधेरा भगाने के लिए 28 प्लेट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाया, पर वो भी विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। कच्ची खपरैल के जर्जर मकान पर प्लांट ठोक दिया गया। बारिश में मकान के साथ पूरा प्लांट ही धराशायी हो गया। पिछले 6 महीने से प्लांट से एक मिनट भी लाइट नहीं जली।
*उधारी की रोशनी में जी रहे ग्रामीण*
अंधेरे में जहरीले सांप, बिच्छू और जंगली जानवरों के डर से ग्रामीण रात भर जागने को मजबूर हैं। मेहनत-मजदूरी करने वाले किसानों ने मजबूरी में उधारी लेकर बाजार से 3-3 हजार की होम लाइट खरीदी है। शासकीय सुविधा नाम की ही रह गई है।
*स्कूल जतन योजना भी जर्जर*
इधर गांव की प्राइमरी स्कूल का भवन 3 साल पहले स्वीकृत हुआ था। ठेकेदार फाउंडेशन डालकर भाग गया। नौनिहाल आज भी टूटी छत के नीचे पढ़ रहे हैं।
ग्राम के छबिलाल ओटी, टिकेश जगत, अभिराम मरकाम, चमरू राम मंडावी, शत्रुघ्न मरकाम, रूपेश मरकाम सहित महिला ग्रामीण रैलमति ओटी, सोनबाई नेताम, जयंती बाई ने कलेक्टर से मांँग की है कि सौर प्लांट को पक्की जगह पर तुरंत चालू किया जाए और स्कूल भवन पूरा किया जाए।