“मोर बेटी मन ल मोर ले मिलवा देव साहेब”, तमिलनाडु में फंसीं दो बेटियों के लिए बेबस पिता की कलेक्टर से मार्मिक फरियाद

Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/मैनपुर।  एक पिता के लिए इससे बड़ी बेबसी और क्या होगी कि उसकी बेटियां उससे हजारों किलोमीटर दूर हों, घर लौटना चाहती हों और वह चाहकर भी उन्हें अपने पास वापस न ला पा रहा हो।
देवभोग क्षेत्र के ग्राम सेंदमुड़ा निवासी तुलसीराम मरकाम इन दिनों इसी दर्द से गुजर रहे हैं। बेटियों की चिंता ने उन्हें जिला कलेक्टर के जनदर्शन तक पहुंचा दिया। हाथ में आवेदन था, दिल में बेटियों की चिंता और जुबां पर सिर्फ एक फरियाद—“साहब… मेरी बेटियों को किसी तरह घर वापस बुला दीजिए।”
तुलसीराम की बेटियां हेमबती नागेश और रंजीता मरकाम रोजगार की तलाश में तमिलनाडु गई थीं। पिता के मुताबिक, उन्हें सिलाई मशीन से जुड़े काम का भरोसा देकर बाहर ले जाया गया था। लेकिन अब परिवार के अनुसार दोनों युवतियां वहां से वापस अपने घर लौटना चाहती हैं। आवेदन में यह भी कहा गया है कि दोनों की तबीयत खराब हो रही है।

रोजगार का सपना लेकर निकली थीं बेटियां, अब घर की राह देख रही हैं: परिवार के मुताबिक, बेहतर रोजगार की उम्मीद में दोनों बेटियां अपने घर और परिवार से दूर तमिलनाडु गई थीं। किसी पिता के लिए यह उम्मीद होती है कि उसकी बेटी बाहर जाकर काम करेगी, कुछ कमाएगी और अपने परिवार का सहारा बनेगी। लेकिन आज उसी पिता के लिए बेटियों का दूर प्रदेश में होना चिंता का कारण बन गया है।।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अजय और उसके साथी दोनों युवतियों को तमिलनाडु ले गए थे, जहां वे काम कर रही हैं। अब दोनों युवतियां कथित तौर पर घर लौटना चाहती हैं, लेकिन पिता के अनुसार उन्हें वापस आने में परेशानी हो रही है।

“बेटियां घर आना चाहती हैं, लेकिन पिता उन्हें लेने भी नहीं पहुंच पा रहा: सबसे मार्मिक स्थिति यह है कि बेटियां घर लौटने की इच्छा जता रही हैं, लेकिन हजारों किलोमीटर की दूरी और आर्थिक परिस्थितियों के कारण परिवार उन्हें खुद वापस लाने की स्थिति में नहीं है।
पिता की चिंता तब और बढ़ गई जब उसे बेटियों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली।

एक तरफ बेटियां परदेस में हैं और दूसरी तरफ गांव में बैठा पिता उनकी चिंता में परेशान है। फोन पर बेटियों की आवाज सुनकर भी वह उन्हें अपने सामने नहीं देख पा रहा। पिता की बेबसी यही है कि वह चाहता है कि बेटियों को तुरंत अपने पास बुला ले, लेकिन परिस्थितियां उसके रास्ते में खड़ी हैं।

कलेक्टर के दरबार में पहुंची पिता की आखिरी उम्मीद: इसी बेबसी के बीच तुलसीराम मरकाम जिला कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचे और बेटियों की सुरक्षित वापसी के लिए आवेदन सौंपा। उन्होंने संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कराने के साथ दोनों बेटियों की वर्तमान स्थिति का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

आवेदन के साथ संबंधित व्यक्ति और उसके साथी के मोबाइल नंबर सहित बेटियों के आधार कार्ड तथा लोकेशन से जुड़े दस्तावेजों की छायाप्रति भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है।

अब प्रशासन से उम्मीद—सिर्फ बेटियों की खबर नहीं, सकुशल वापसी चाहिए: इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी। लेकिन फिलहाल परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल किसी आरोप की पुष्टि नहीं, बल्कि दो बेटियों की सुरक्षा और उनकी वर्तमान स्थिति है। दूर तमिलनाडु में बेटियां और यहां देवभोग के गांव में उनका इंतजार करता पिता—इस दूरी ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। पिता अब प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।

उसकी फरियाद में बस एक ही बात है—

“मेरी बेटियां मेरे पास वापस आ जाएं… मैं उन्हें अपनी आंखों के सामने देखना चाहता हूं।”

अब परिवार को इंतजार है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बेटियों की स्थिति की जानकारी जुटाए और यदि वे वास्तव में घर लौटना चाहती हैं, तो उनकी सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए।

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