
अगर ड्यूटी नहीं हटाई जाती हैं तो कृषि विभाग का समस्त कार्य बाधित होगा। जिसके कारण कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने ज्ञापन सौपा। अगर ड्यूटी नहीं हटाई जाएगी तो कृषि विभाग का विभागीय कार्य बाधित होगा।
कृषि विस्तार अधिकारियों को न तो नक्शा-बटांकन का तकनीकी ज्ञान है और न ही वे खसरों की वास्तविक सीमाओं से वाकिफ होते हैं। ऐसे में पटवारी और आरआई के पीछे हटने के बाद कृषि अधिकारियों को आगे धकेलना पूरी तरह अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। संघ ने स्पष्ट किया है कि गैर-विभागीय राजस्व ड्यूटी थोपने से कृषि विभाग की विभागीय योजनाओं, किसान हितैषी कार्यक्रमों और मैदानी कार्यों पर सीधा बुरा असर पड़ेगा।
क़ृषि स्नातक शासकीय क़ृषि अधिकारी संघ ने पीवी एप की जमीनी हकीकत उजागर करते हुए गंभीर तकनीकी सवाल खड़े किए हैं।
संघ का कहना है कि भुइयां का नक्शा लगभग 3 वर्ष पुराना है। जमीन पर विभाजित लाखों खसरों का बटांकन नक्शे में दर्ज ही नहीं है। ऐसे में बिना सीमांकन और किसान की मौजूदगी के मौके पर खसरा पहचानना किसी भी सूरत में संभव नहीं है।
वर्तमान में खेतों में धान की फसल खड़ी है और भारी जलभराव है। पीवी एप की बाध्यता है कि खेत के चारों कोनों में जाकर जीपीएस लोकेशन के साथ लाइव फोटो लेनी होगी। पानी और कीचड़ से लबालब खेतों के कोनों तक पहुंचना जान जोखिम में डालने जैसा है।
कृषि अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक यह अव्यावहारिक आदेश वापस नहीं लिया जाता और कृषि अमले को इस राजस्व कार्य से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक वे पीवी एप से गिरदावरी का कार्य कतई नहीं करेंगे। संघ ने शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि कृषि विस्तार अधिकारियों को उनके मूल दायित्वों जैसे किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज-खाद उपलब्धता और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन तक ही सीमित रखा जाए, न कि दूसरे विभाग की कार्य का बोझ उन पर लादा जाए।