हेडलाइन भेजीपदर व्यपवर्तन मुख्य नहर से प्रभावित किसानों का दर्द—6-7 साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा, कलेक्टर से लगाई गुहार
युमेन्द्र कश्यप/मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डेण्डूपदर के प्रभावित किसानों का मामला अब प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। किसानों का आरोप है कि भेजीपदर व्यपवर्तन मुख्य नहर/नाली निर्माण के लिए उनकी कृषि भूमि प्रभावित हुई, लेकिन करीब 6 से 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
किसानों का कहना है कि उनकी जमीन शासन की परियोजना के लिए प्रभावित हुई थी। उस समय उम्मीद थी कि नियमानुसार समय पर मुआवजा मिलेगा, लेकिन वर्षों गुजरने के बावजूद भुगतान नहीं होने से प्रभावित किसान आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं।
इसी समस्या को लेकर प्रभावित किसानों ने भांगीद/रायपुर कलेक्टर शिविर के माध्यम से कलेक्टर महोदय के नाम आवेदन सौंपकर पूरे मामले की जांच और लंबित मुआवजे के शीघ्र भुगतान की मांग की है।
आवेदन में किसानों ने मांग की है कि—
भेजीपदर व्यपवर्तन मुख्य नहर/नाली से प्रभावित किसानों के लंबित मुआवजे की जांच कराई जाए।
जिन किसानों की मुआवजा राशि स्वीकृत हो चुकी है, उनका शीघ्र भुगतान कराया जाए।
दस्तावेजों की कमी अथवा अन्य कारणों से लंबित मामलों में ग्रामवार/किसानवार सूची तैयार कर समस्या का निराकरण किया जाए।
संबंधित विभाग के अधिकारियों को समय-सीमा निर्धारित कर मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं।
जिन किसानों का प्रकरण लंबित है, उन्हें प्रकरण की वर्तमान स्थिति और देरी का स्पष्ट कारण बताया जाए।
🎤 बड़ा सवाल
जब किसानों की जमीन शासन की परियोजना के लिए प्रभावित हुई है, तो आखिर 6-7 साल बाद भी मुआवजा क्यों अटका हुआ है?
क्या किसानों की फाइलें विभागीय कार्यालयों में धूल खा रही हैं?
क्या मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया में लापरवाही हुई है?
और अगर दस्तावेज या किसी अन्य वजह से भुगतान रुका है, तो इतने वर्षों में किसानों को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई?
अब प्रभावित किसान सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अपने हक की मुआवजा राशि और समयबद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
देखना होगा कि किसानों की इस गुहार पर जिला प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है और वर्षों से लंबित मुआवजे का भुगतान कब तक सुनिश्चित होता है।