
कार्यक्रम के लिए महानदी तट एवं घाट क्षेत्र की साफ-सफाई की गई। इसके बाद शाम को आयोजित गंगा आरती में सात पुरोहितों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ आरती संपन्न कराई। वैदिक मंत्रोच्चार, धूप और आरती की भक्ति भावना से त्रिवेणी संगम का वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया। महानदी के तट पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं नागरिकों ने आरती में सहभागिता कर धार्मिक आस्था प्रकट की। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से नदियों की स्वच्छता, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस पहल ने लोगों को नदियों एवं घाटों को स्वच्छ रखने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
आरु साहू के छत्तीसगढ़ी लोकगीतों पर झूमे दर्शक-
गंगा आरती के बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की युवा लोक कलाकार आरु साहू ने अपनी टीम के साथ आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उनके भक्तिमय छत्तीसगढ़ी लोकगीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक संस्कृति और भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के दौरान उपस्थित नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सांस्कृतिक संध्या के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया गया। महानदी तट पर धार्मिक आयोजन और लोक संस्कृति का यह संगम लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।स्वच्छ नदी, संरक्षित जल और समृद्ध लोक संस्कृति का संदेश –
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित महानदी गंगा आरती एवं सांस्कृतिक संध्या ने धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश दिया। नदी घाट की साफ-सफाई से शुरू हुई इस पहल में लोगों को जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने, प्लास्टिक एवं कचरे का उचित निस्तारण करने और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नदियों का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी, स्वच्छता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण से ही महानदी जैसे प्राकृतिक एवं धार्मिक महत्व के स्थलों को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाए रखा जा सकता है।