*पाँचवीं अनुसूची, PESA और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से लैस 7 संकल्प पारित कहा, PESA को न मानने वाला अधिकारी अनुसूचित क्षेत्र में पद पर रहने योग्य नहीं*
पूरन मेश्राम/गरियाबंद।तहसील मुख्यालय मैनपुर से 30 किमी दूर राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी के शासकीय स्कूल मैदान में 17अक्टूम्बर शनिवार का वो हुआ जो क्षेत्र के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व के बैनर तले 128 रूढ़िगत ग्राम सभाओं के महासंघ ने महा ग्राम सभा आयोजित कर खुद को सक्षम सरकार घोषित कर दिया।
यह सभा भारत के संविधान के अनुच्छेद 13(3)(क) (रूढ़ि प्रथा ही विधि है) अनुच्छेद 244(1), पाँचवीं अनुसूची पैरा 5, PESA धारा 4(क) और सुप्रीम कोर्ट के समता जजमेंट 1997 व नियामगिरी जजमेंट 2013 पैरा 60 के तहत गठित की गई थी। अध्यक्षता रूढ़िगत पटेल, गायता, पुजारी मंडल ने की। उपस्थिति 80 से 1 लाख मतदाताओं की थी।सभा ने 7 ऐतिहासिक संकल्प पारित किए जो अब इस क्षेत्र में कानून हैं।
संकल्प 1- विस्थापन पर पूर्ण रोक NTCA गाइडलाइन 2021 और FRA धारा 4(2) का हवाला देते हुए कहा कि कोर/बफर से बिना ग्राम सभा की लिखित सहमति के एक भी परिवार नहीं हटेगा। टाइगर के नाम पर मौखिक दबाव FRA धारा 4(5) और अनुच्छेद 19(1)(ङ) का उल्लंघन है।
संकल्प 2 – नाइट कर्फ्यू निरस्त वन विभाग द्वारा शाम 7 बजे बाद चेक पोस्ट बंद करना PESA धारा 4(घ) और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। सभा ने 24 घंटे आपातकालीन कॉरिडोर और एंट्री रजिस्टर की मांग की, ताकि प्रसव, बीमारी, शादी में कोई न रुके।
संकल्प 3 और 5 – मोंगराडीह सहित सभी वन ग्रामों को भू-स्वामी हक सबसे ज्वलंत मुद्दा मोंगराडीह जैसे वन ग्राम एवं असर्वेक्षित गांवों का था। सभा ने कहा राजपत्र में प्रकाशन 99% काम हुआ, फिर किसान अतिक्रमणकारी कैसे FRA धारा 3(1)(झ) के तहत सभी वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित कर भू स्वामी हक देने का संकल्प।
संकल्प 4 – ग्राम गणराज्य बोर्ड नियामगिरी फैसले का हवाला देते हुए हर गांव में रूढ़िगत ग्राम गणराज्य बोर्ड और ग्राम कोष स्थापित करने का ऐलान। बिना धारा 4(छ) की अनुमति के कोई खनन/अधिग्रहण नहीं होगा।
संकल्प 6 – विद्युतीकरण। सीतानदी के 40, उदंती के 17 और राजापड़ाव के 30 गाँव पारा टोला सहित सभी गांवों में FRA धारा 3(2) के तहत बिजली पहुंँचाने का संकल्प।
संकल्प 7 – सबसे बड़ा जनप्रतिनिधियों पर 60 दिन की समय-सीमा यह इस सभा का सबसे अलग फैसला था। सभा ने कहा अनुच्छेद 243(छ) के तहत इन संकल्पों को लागू कराना सांसद विधायक का संवैधानिक कर्तव्य है।17 दिसंबर 2026 तक 60 दिन का समय दिया जाता है। यदि कार्यवाही नहीं हुई तो संबंधित जनप्रतिनिधि को PESA धारा 4(ट) के तहत ग्राम सभा का असहयोगी माना जाएगा, उसकी ग्राम सभा में सामाजिक जवाबदेही होगी और महामहिम राज्यपाल व राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से शिकायत होगी। सभा ने दो टूक कहा PESA ग्राम सभा को नहीं मानने वाला जनप्रतिनिधि/अधिकारी,संविधान को नहीं मानने वाला है और वह अनुसूचित क्षेत्र में पद पर बने रहने योग्य नहीं है।
बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने कहा हजारों साल से हमारे पुरखा जंगल में हैं,हम जंगल छोड़कर कहां जाएं जल जंगल जमीन हमारी अस्मिता है। नाइट कर्फ्यू से इलाज के बिना लोग मर रहे हैं। यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाऊंँगा।
सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने वन विभाग को चेतावनी दी हमारे पूर्वजों की वजह से जंगल जानवर सुरक्षित हैं। बेदखली का कुंठित प्रयास अस्वीकार्य है। संगठन में शक्ति है,हमें तोड़ने के प्रयास होंगे पर उलझना नहीं है। क्षेत्र की जनता मेरा परिवार है।
कार्यक्रम में SDM नेहा भेड़िया,नायब तहसीलदार सहित वरिष्ठ समिति के मुखिया अधिवक्ता सिरधन सोम,मनोज साक्षी,नरेश मांँझी,रूपेश ध्रुव,अर्जुन नायक,दैनिक मंडावी,
पूरन मेश्राम,रेवा देवदास, हिम्मत सिंह नेताम,टीकम
नागवंशी,दीनाचंद मरकाम,महेंद्र नेताम,रमूला बाई नेताम,राधिका बाई नेताम, कृष्ण कुमार नेताम,भानू राम नेताम,शंकर लाल नेताम,नरेश नेताम, पुरुषोत्तम परदे,रविंद्र मरकाम, पतंग मरकाम,नकुल नागेश,फलेश मरकाम,गोकुल राम नेताम,धनेश्वर मरकाम, माखन सलाम,ईश्वरी नेताम, चैतू राम,बिसरू राम मरकाम, योगेश कुमार अग्रवानी, दीनदयाल मरकाम,प्रभास नाग,जगत कुंजाम,प्रताप सिंह अग्रवानी,अशोक मरकाम,तीरथ नाग,मधु ओटी, करण नाग, सुंदर मंडावी,कृष्णा बाई मंडावी,चंद्रिका बाई मरकाम,निशा देवी पटेल, मिथिला बाई नेताम,रोशनी बाई मरकाम,राज बाई जगत, रुक्मणी जगत,राधाबाई नेताम,कसनी बाई नेताम सहित हजारों महिलाएं पुरुष शामिल हुए। सभा की शुरुआत संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर की पूजा और जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम के छोटे भाई और अमाड़ सरपंच प्रतिनिधि गोपाल नेताम को 2 मिनट मौन श्रद्धांजलि से हुई।
अंत में सभी संकल्प ध्वनि मत से हो हो की हुंकार के साथ पारित किए गए। प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री,कलेक्टर और टाइगर रिजर्व डायरेक्टर को भेजी गई है।