छत्तीसगढ़ के प्रमुख गढ़ पैरी उद्गम में नहीं होता रावण दहन, आदिवासी संस्कृति के अनुसार शक्ति पूजा और ‘रैनी मार’ की परंपरा

Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/मैनपुर। छत्तीसगढ़ की प्राचीन आदिवासी संस्कृति, लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं के अनूठे केंद्र पैरी उदगम भाठीगढ़ में चार दिवसीय ऐतिहासिक ‘देव दशहरा’ पर्व का भव्य आयोजन आज किया जा रहा है। आज विजयदशमी के अवसर पर क्षेत्र कोने-कोने से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं, डांग-डोली के साथ पहुँचे देवी-देवताओं द्वारा पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों के शौर्य प्रदर्शन के बीच रैनी मार गढचढाई कर यहाँ का दशहरा पर्व अपने आप में एक अद्भुत और अलौकिक अनुभव बन गया। गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के इस प्रमुख धार्मिक स्थल पर मनाए जाने वाले देव दशहरा की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है और इस बार भी आस्था का महासागर यहाँ देखने को मिला।

देशभर में जहाँ दशहरे के दिन रावण के पुतले दहन किए जाते हैं, वहीं पैरी उदगम भाठीगढ़ में रावण दहन की परंपरा नहीं है। यहाँ आदिवासी संस्कृति और लोक मान्यताओं के अनुसार शक्ति पूजा की जाती है। नवरात्र की नवमी से ही यहाँ दशहरा पर्व का शुभारंभ हो जाता है।विजयादशमी के पावन दिन आज मंगलवार को पहाड़ी पर स्थित क्षेत्र की प्रमुख देवी मां बम्हनीन माई, मां दंतेश्वरी के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ सभी देवी-देवताओं की सवारी ग्राम प्रमुख रहे स्वर्गीय हेमसिंग नेगी के निवास पर पहुँची। यहाँ राजा-रजवाड़े के जमाने की प्राचीन तलवारों, खड़गों और अन्य अस्त्र-शस्त्रों की विधि-विधान से पूजा की गई।

शस्त्र पूजन के पश्चात जब देवी-देवताओं ने प्राचीन अस्त्र-शस्त्र धारण किए, तो पूरा वातावरण पारंपरिक गीतों और जयकारों से गूंज उठा,राजा-रजवाड़े के जमाने की तलवार, खड़ग, बाना, सांगा और अन्य अस्त्र-शस्त्रों को लेकर देवी-देवताओं ने अद्भुत शौर्य नृत्य और कला का प्रदर्शन किया।

शाम होते-होते राजभर की माता जिड़ारिन देवी की सवारी हजारों लोगों की रैली और भव्य ध्वज के साथ भाठीगढ़ की सीमा पर पहुँची। ठीक उसी समय राज देवी बस्तरहीन, गादी माई और रणमौली खांड़ा देव भी अपने डांग-डोली और गाजे-बाजे के साथ वहाँ पहुँच गए,भाठीगढ़ पहुँचने पर स्थानीय देवी-देवताओं और हजारों श्रद्धालुओं ने बाहर से आए सभी देवी-देवताओं का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया। इसके बाद मां बम्हनीन, मां दंतेश्वरी, मां काला कुंवर, मां गढ़वाली, मां भठीगढ़ीन, मां जिड़ारिन, मां बस्तरहीन, मां गादी माता,कचना धुर्वा देव सहित तमाम प्रमुख देवी-देवताओं और हजारों की भीड़ ने तेज गति और पूरे उत्साह के साथ ‘रैनी भांठा’ की ओर रुख किया तथा गढ़ चढ़ाई कर एवं रैनी भांठा पहुँचकर पारंपरिक रूप से रैनी (सोनपत्ता) मारकर दशहरा पर्व की मुख्य रस्म पूरी की गई। इस दौरान जमकर तलवारें और लाठियाँ भांजी गईं। इस रोमांचक और ऐतिहासिक दृश्य को देखने के लिए प्रदेश के कोने-कोने से लोग पहुँचे थे।

इस ऐतिहासिक देव दशहरा पर्व में बारह पाली के अंतर्गत आने वाले 36 गांवों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने रैनी मारने के पश्चात क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए देवी-देवताओं से आशीर्वाद लिया। पर्व के दौरान सुरक्षा, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका सराहनीय रही। इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र के प्रमुख राज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भाठीगढ राज प्रमुख हरिशचंद नेगी, छबिलाल दीवान, मुखतियार दीवान, प्रेमसाय जगत, खेदू नेगी,आशाराम यादव, पवन दीवान, सुन्दर कपिल, देवी सिंह, शोभा राम कुम्हार, लोकेश्वरी नेताम, सरपंच पुष्पा नेगी, जनपद सदस्य जामुन बाई नेगी, पूर्व सरपंच जिलेन्द्र नेगी, पूर्व जनपद सदस्य डाकेश्वर नेगी, राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय, घसिया राम नेगी, देवी सिंह चक्रधारी, नाथु राम ध्रुवा, राधेश्याम नेगी, छबीराम ध्रुव, जयराम चक्रधारी भागसिंह ध्रुव, रामसिंह ध्रुव, लिलेश साहू, लिलेश चक्रधारी, खुमेश्वर ध्रुव, सुरेश देववंशी, महेन्द्र नेताम, खेलन दीवान, बसंत जगत, गंगाराम जगत, लिकेश यादव, रामकृष्ण ध्रुव, गेंदु यादव, शेख हसन खान, उत्तम पटेल, थानूराम पटेल, सोहन नागेश,माखनदास वैष्णव, थानु वैष्णव, विशेषर सिक्का, तुलसी राम नागेश, बुधराम निर्मलकर, दया राम यादव, अकबर नागेश, इतवारी ध्रुव, महेन्द्र साहू, किशन मरकाम, रामदेव ध्रुव, कुबेर ध्रुव, विमल यादव, गोविंदा यादव, दामोदर नेगी,गज्जू नेगी,जवाहर लाल, परमानंद पटेल, मनीष पटेल, परेश्वर नेगी,सहित बारह पाली के 36 ग्रामों के हजारों ग्रामीण उपस्थित रहे।

देवी देवताओं द्वारा गढ़ चढ़ाई रैनी करने के बाद सभी लोगों ने एक दूसरे को सोन पत्ता भेंट कर जहां विजयदशमी पर्व की बधाई दी। वहीं दूसरी ओर भाठीगढ राज प्रमुख हरिश्चंद्र नेगी सभी क्षेत्रवासियों को देव दशहरा पर्व की बधाई दी और क्षेत्र में सुख शांति समृद्धि खुशहाली की कामना किया। वरिष्ठ सिरहा प्रेमसाय जगत, छबी दीवान, मुख्तियार दीवान, पवन दीवान , खेलन दीवान, खेदु नेगी ने भी क्षेत्रवासियों को दशहरा पर्व की बधाई देते हुए यहां परंपरा को हमेशा बनाए रखने की अपील किया है।

पैरी उदगम भाठीगढ़ मे चार दिवसीय ऐतिहासिक दशहरा के चलते आज मंगलवार को मेला का आयोजन किया गया था। मेला में भारी भीड़ लगी रही। देर रात तक मेला में भीड़ देखने को मिली पहाड़ी के नीचे मेला में शामिल होने क्षेत्र भर से लोग पहुंचे हुए हैं। वहीं रात में रंगारंग छत्तीसगढ़ी आर्केस्ट्रा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।