
जानकारी के अनुसार, बरिमा में बाक्साइट खदान की लीज सीएमडीसी को दी गई थी। सीएमडीसी ने यह काम निजी कंपनी मां कुदरगढ़ी एलुमिना एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया। कंपनी पिछले लगभग एक माह से यहां बाक्साइट का उत्खनन कर रही थी। बिना मुआवजा दिए उत्खनन होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
कंपनी के लोगों को ग्रामीणों ने भगाया, रोका काम बिना मुआवजा दिए निजी कंपनी द्वारा बाक्साइट उत्खनन की खबर मिलने पर जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग बरिमा पहुंचीं। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि उनकी जमीन से मुआवजा दिए बिना बाक्साइट का उत्खनन किया जा रहा है। रतनी नाग के नेतृत्व में ग्रामीण खदान पहुंचे और काम बंद करा दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर बिना मुआवजा दोबारा बाक्साइट उत्खनन किया गया तो वे मशीनों में आग लगा देंगे। उन्होंने हंगामा होने की जानकारी सीएमडीसी के अधिकारियों को दी, लेकिन अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
अधिकांश जमीनें आदिवासी वर्ग की बरिमा खदान में जिस इलाके में बाक्साइट का उत्खनन किया जा रहा है, उनमें से अधिकांश जमीनें आदिवासी वर्ग की हैं। जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने कहा कि बिना मुआवजा दिए बाक्साइट उत्खनन अवैध है। दोबारा बाक्साइट उत्खनन किया गया तो कड़ा विरोध किया जाएगा।
बताया गया है कि सीएमडीसी की लीज का समय समाप्त हो चुका था, जिसे एक्सटेंशन करा लिया है। बिना मुआवजा दिए ही सीएमडीसी ने निजी कंपनी को बाक्साइट उत्खनन के लिए लीज एरिया की जमीनें सौंप दी।