
धान खरीदी अभियान 15 नवंबर 2025 को शुरू हुआ और 30 जनवरी 2026 तक चला। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 71,790 किसानों ने स्वेच्छा से अपने 55,790 एकड़ रकबे का समर्पण किया। प्रशासन ने कोचियों और बिचौलियों की ओर से धान खपाने के प्रयासों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए।
अवैध धान और वाहन जब्ती
‘सतर्क एप’ के माध्यम से वास्तविक समय की निगरानी की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 243 केस दर्ज किए गए। इन कार्रवाइयों के तहत 43,900 क्विंटल अवैध धान जब्त किया गया। इसकी अनुमानित कीमत 13.60 करोड़ रुपए रही। साथ ही 50 वाहन भी जब्त किए गए। इस सख्ती से बिचौलियों की ओर से लगभग 363 करोड़र रुपए के अवैध धान खपाने का प्रयास विफल हुआ।
प्रशासनिक नवाचार
धान खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई प्रशासनिक नवाचार लागू किए गए। जिला स्तर के अधिकारियों ने संवेदनशील रास्तों और बॉर्डर्स पर रात्रि गश्त की ताकि बाहरी धान की आवक रोकी जा सके। प्रत्येक केंद्र पर नोडल अधिकारी, जिला स्तरीय नोडल और माइक्रो ऑब्जर्वर की त्रि-स्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू की गई।
50 सदस्यीय विशेष जांच दल ने खरीदी केंद्रों का साप्ताहिक आकस्मिक निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन किया। साप्ताहिक बैठकों में कार्ययोजना की समीक्षा की गई। जिला प्रशासन ने 600 से अधिक किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया, जिन्हें पंजीकरण या तकनीकी दिक्कतों का सामना था।