
प्रकरण के अनुसार आरोपी रामभजन सोनवानी घटना के समय महाविद्यालय में प्राचार्य पद पर पदस्थ था। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 75(3) और धारा 79 के तहत आरोप तय किए गए थे।
आवेदन पर हस्ताक्षर कराने गई थी छात्रा
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 अगस्त 2024 को दोपहर करीब 3:30 बजे पीड़िता अपनी सहेली के साथ आवेदन पर हस्ताक्षर कराने प्राचार्य कक्ष गई थी। इसी दौरान आरोपी ने पीड़िता के प्रति अशोभनीय टिप्पणियां कीं, गंदे इशारे किए, लज्जा का अनादर किया और हस्ताक्षर के बहाने उसे घर बुलाने का प्रयास किया।
थाने में दर्ज हुई शिकायत, FIR के बाद शुरू हुई जांच
पीड़िता ने 16 अगस्त 2024 को थाना रामानुजगंज में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और जांच शुरू की गई। इस दौरान पुलिस ने घटनास्थल का नक्शा तैयार किया।
साक्षियों के बयान दर्ज किए और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्य जब्त किए। अनुसंधान पूरा होने के बाद 26 सितंबर 2024 को अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने साक्ष्यों को माना विश्वसनीय
विचारण के दौरान न्यायालय ने पीड़िता, उसके पिता और अन्य साक्षियों के कथनों को विश्वसनीय माना। न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर छात्रा की गरिमा का उल्लंघन किया।
न्यायालय ने कहा कि इस तरह का आचरण केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की मर्यादा के भी विरुद्ध है।
धारा 75(3) में 6 माह की सजा, धारा 79 में 1 वर्ष का कारावास
न्यायालय ने आरोपी को धारा 75(3) के तहत 6 माह का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपए अर्थदंड, धारा 79 के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अर्थदंड की राशि पीड़िता को देने के निर्देश
न्यायालय ने आदेश दिया है कि अर्थदंड की राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। यह फैसला शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।