
भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के निर्देशानुसार एक राष्ट्र एक राशनकार्ड योजना के तहत आधार प्रमाणीकरण के जरिए ही खाद्यान्न वितरण अनिवार्य किया गया है। दुर्ग जिले में इस योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही का बड़ा आंकड़ा सामने आया है।
दुर्ग जिले में 4 लाख से ज्यादा राशन कार्ड
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, दुर्ग जिले में कुल 4,96,354 राशनकार्ड प्रचलित हैं। इन राशनकार्ड में कुल 16,86,164 सदस्य पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 14,86,690 सदस्यों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 1,99,474 सदस्यों का ई-केवाईसी अब भी शेष है। यह आंकड़ा प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
राशन दुकानों में ई-केवाईसी की सुविधा
खाद्य नियंत्रक कार्यालय दुर्ग के अनुसार, जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों में संचालित ई-पॉस मशीनों में ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा भारत सरकार ने मेरा ई-केवाईसी ऐप के माध्यम से भी प्रक्रिया को आसान बनाया है।
एंड्रायड मोबाइल यूजर्स गूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर राज्य का चयन कर आधार नंबर डालकर ओटीपी और फेस ई-केवाईसी के जरिए घर बैठे प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
5 साल के कम बच्चों को ई-केवाईसी से छूट
सरकार ने 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ई-केवाईसी से छूट दी है, लेकिन बाकी सभी सदस्यों के लिए यह अनिवार्य है। प्रशासन का कहना है कि जिन राशनकार्डधारकों के परिवार में किसी भी सदस्य का ई-केवाईसी अधूरा है, वे तुरंत इसे नजदीकी शासकीय उचित मूल्य दुकान या ऐप के जरिए पूरा कराएं।
28 फरवरी 2026 के बाद ई-केवाईसी अधूरा रहने पर राशन वितरण रुकने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।