
प्रभावित वोटरों का कहना है कि वे मूलत: बिहार के रहने वाले थे, लेकिन बचपन से इसी इलाके में रह रहे हैं। SIR में नाम नहीं आने पर प्रभावितों ने 11 फरवरी को कलेक्ट्रेट पहुंचकर नाम जुड़वाने के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ये वोटर्स कांग्रेस समर्थित हैं, इसिलए भाजपा के इशारे पर निर्वाचन आयोग ने नाम काटा है। वहीं इन आरोपों पर बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस खुद नाम कटवाकर राजनीति करना चाह रही।
दरअसल, यह मामला बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के चांटीडीह इलाके से जुड़ा है। यहां बूथ नंबर 191, 192 और 193 वार्ड नंबर 55-56 में आते हैं। यह क्षेत्र मुस्लिम बाहुल माना जाता है। बूथ नंबर 191 के 10, बूथ नंबर 192 के 15 और बूथ नंबर 193 के 92 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ‘प्राण’ नामक व्यक्ति ने फॉर्म-7 जमा किए गए थे।
फॉर्म 7 मतदाता सूची से किसी का नाम हटवाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि किसने ये फॉर्म भरा ये जानकारी सामने नहीं आई है।
BLO ने मौके पर पहुंचकर जांच की, सभी पते पर मौजूद थे
फॉर्म-7 जमा होने के बाद बीएलओ ने मौके पर जाकर जांच की। जांच में सामने आया कि सभी मतदाता अपने पते पर मौजूद हैं और कोई भी मृत नहीं है। बीएलओ ने मौके पर मतदाताओं की फोटो ली, दस्तावेज दोबारा लिए और रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी
गड़बड़ी की जांच की मांग
इस गड़बड़ी की जानकारी बाद में कांग्रेस के बीएलए और नेताओं को मिली। जिसके बाद मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए भाजपा सरकार पर साजिश का आरोप लगाया। 11 फरवरी को विरोध प्रदर्शन करते हुए पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने मामले की जांच की मांग की है।
पूर्व जिलाध्यक्ष बोले- कांग्रेस समर्थित मतदाता निशाने पर
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कहा कि एसआईआर के तहत दस्तावेज जांच के बाद प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। 23 जनवरी तक नाम जोड़ने, हटाने और स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए गए थे।
तीन बूथों में अचानक 117 फॉर्म-7 आवेदन आने का खुलासा हुआ। शिकायत में कहा गया कि ये मतदाता यहां रहते नहीं हैं। जांच में यह शिकायत गलत निकली। सभी मतदाता अपने पते पर मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं और कांग्रेस समर्थित हैं।
कलेक्टर से मिलकर जांच की मांग
विजय केशरवानी ने कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी संजय अग्रवाल से मिलकर फॉर्म-7 किसने भरा इसकी जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगह बीएलओ को दबाव में काम करने को मजबूर किया जा रहा है। उन्हें कहा जा रहा है कि फॉर्म ऊपर से आया है और नहीं लेने पर कार्रवाई होगी।