अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र के चार वार्डों में पीलिया के मरीजों की बढ़ती संख्या की खबरों के बीच स्वास्थ्य अमले ने घर-घर सर्वे कर संदिग्ध मरीजों के ब्लड सैंपल लिए

अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र के चार वार्डों में पीलिया के मरीजों की बढ़ती संख्या की खबरों के बीच स्वास्थ्य अमले ने घर-घर सर्वे कर संदिग्ध मरीजों के ब्लड सैंपल लिए। बुधवार को चार वार्डों में की गई सैंपलिंग में कोई नया पीलिया मरीज नहीं मिला।

पीलिया से एक बच्चे और एक युवक की मौत की खबर को भी स्वास्थ्य विभाग ने खारिज कर दिया है। विभाग का कहना है कि दोनों की मौत दूसरी बीमारियों की वजह से हुई है। इस मुद्दे को लेकर बुधवार को कांग्रेस ने नगर निगम का घेराव किया था।

नवागढ़ जोन में करीब 45 पीलिया मरीज मिलने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में शिविर लगाकर ब्लड सैंपल लिए और पेयजल के नमूने जांच के लिए पीएचई लैब भेजे।

25 फरवरी को मिली रिपोर्ट के मुताबिक 35 में से 34 पानी के नमूने तय मानकों पर खरे उतरे, जबकि एक नमूना अमानक पाया गया। बाकी नमूनों की रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

सीमित लोगों में मिला संक्रमण

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नवागढ़ जोन में जिन लोगों में पीलिया की पुष्टि हुई, वे पिछले दो महीने के भीतर संक्रमित पाए गए थे और इनमें से अधिकांश अब स्वस्थ हैं। 23 और 24 फरवरी को लगाए गए कैंप में 47 लोगों की रिपोर्ट मिल चुकी है, जिनमें एक व्यक्ति पीलिया से संक्रमित पाया गया। अन्य सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है।

सरगुजा के सीएमएचओ डॉ. पी.एस. मार्को ने बताया कि खटिकपारा में 13 वर्षीय बालक और जनपदपारा में 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत को पीलिया से जोड़कर देखा जा रहा था। मेडिकल हिस्ट्री की जांच में स्पष्ट हुआ कि दोनों की मौत अन्य बीमारियों के कारण हुई।

चार वार्डों में घर-घर सर्वे

सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को के निर्देश पर बुधवार को मोमिनपुरा, नवागढ़, खटिकपारा और झंझटपारा नमनाकला में घर-घर सर्वे अभियान चलाया गया। नर्सिंग की छात्राओं की भी ड्यूटी लगाई गई। जांच के दौरान कई संदिग्ध लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि आंखों या त्वचा का पीला पड़ना, कमजोरी, भूख न लगना, उल्टी या बुखार जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और साफ पानी का उपयोग करें।

कांग्रेस ने लगाए लापरवाही के आरोप

कांग्रेस ने शहर में दूषित पेयजल सप्लाई का आरोप लगाया है। इसी के विरोध में बुधवार को नगर निगम का घेराव किया गया। नगर निगम ने बताया कि पेयजल पाइप लाइनों की मरम्मत की जा रही है, जिससे पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

नोडल अधिकारी डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने कहा कि पीलिया गंदे पानी से हो सकता है, लेकिन इसके और भी कारण होते हैं। खराब पानी से उल्टी-दस्त हो सकते हैं। ई-कोलाई बैक्टीरिया से भी उल्टी-दस्त होते हैं, पीलिया नहीं। जिन लोगों में पीलिया की पुष्टि हुई है, उनकी अलग से जांच चल रही है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि हर महीने करीब 100 पीलिया मरीज मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचते हैं और इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटते हैं। पीलिया के मामलों में अचानक वृद्धि नहीं देखी गई है।

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