धमतरी जिले के लोहरसी गांव में जिला भाजपा कार्यालय के लिए जमीन आवंटन का विरोध तेज हो गया

Chhattisgarh Crimesधमतरी जिले के लोहरसी गांव में जिला भाजपा कार्यालय के लिए जमीन आवंटन का विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव किया। उनका आरोप है कि पंचायत सरपंच ने कुछ पंचों के साथ मिलकर गांव की एक एकड़ जमीन गोपनीय तरीके से भाजपा को बेच दी।

ग्रामीणों के मुताबिक यह जमीन लंबे समय से बच्चों के खेलने और मवेशियों के चारागाह के रूप में उपयोग होती रही है। उनका कहना है कि बिना ग्रामसभा की जानकारी के जमीन का सौदा किया गया। गांव के लोगों को इसकी जानकारी बाद में मिली, जिससे आक्रोश फैल गया।

लोहरसी ग्राम विकास समिति के महिला, पुरुष, युवा करीब 10 ट्रैक्टर और अन्य वाहनों से जनपद कार्यालय के पास पहुंचे। वहां से नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए थे।

बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी तैनात रहे। इस दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को अपर कलेक्टर से चर्चा के लिए बुलाया गया।

“सरपंच हटाओ, गांव बचाओ” के लगे नारे

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने “सरपंच हटाओ, गांव बचाओ” के नारे लगाए। उनका आरोप है कि सरपंच, सचिव, उप-सरपंच समेत कुछ पंचों ने मिलकर एक एकड़ जमीन गुपचुप तरीके से बेच दी। ग्रामीणों की मांग है कि जमीन को निस्तारी और चारागाह के लिए सुरक्षित घोषित किया जाए।

शपथ लेने के बाद भी वादा तोड़ने का आरोप

ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में तिरंगा झंडा के सामने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली गई थी कि जनता से पूछकर ही निर्णय लिए जाएंगे। अब उसी वादे को भुलाकर जमीन बेच दी गई।

कुछ ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव में बैठक बुलाई गई थी, लेकिन सरपंच समेत अन्य पंच उसमें शामिल नहीं हुए। उनका आरोप है कि यदि कोई अनियमितता नहीं होती तो बैठक में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट की जाती और गांव स्तर पर ही समाधान निकल जाता।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि सरपंच, सचिव, उप-सरपंच समेत संबंधित पंचों के खिलाफ शासकीय नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जमीन चोरी की तरह बेची गई है। ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन उनका कहना है कि अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।

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