
समिति की अनुशंसा पर अध्यक्ष और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अनुमोदन दिया। इसके बाद धानू महत को उनके बेटे का विधिक अभिभावक नियुक्त किया गया। जय महत गंभीर बौद्धिक दिव्यांगता से पीड़ित हैं। दैनिक जीवन के सभी कार्यों के लिए वे अपने पिता पर पूरी तरह निर्भर हैं।
पेंशन बंद होने से बढ़ी आर्थिक परेशानी
विधिक अभिभावक नियुक्त नहीं होने से जय को मिलने वाली पेंशन पिछले एक साल से बंद थी। इससे परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सीमित संसाधनों में धानू महत लंबे समय से अपने बेटे की देखभाल कर रहे हैं।
स्थल निरीक्षण के बाद लिया निर्णय
राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 की धारा 13(2) के तहत गठित लोकल लेवल कमेटी, जिला रायपुर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थल निरीक्षण किया। जांच में जय की स्थिति की पुष्टि हुई। इसके बाद विधिक संरक्षण देने का निर्णय लिया गया। इस पहल से पेंशन बहाल होने के साथ अन्य योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ।