
लक्ष्मी वर्मा पार्षद से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक का पद संभाल चुकी हैं। पहली बार उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया गया है। राज्यसभा की दोनों सीटें अभी कांग्रेस के खाते में है, लेकिन विधानसभा चुनाव में केवल 35 सीटें जीतने के कारण एक सीट भाजपा के खाते में जा रही है।
विधानसभा में सीटों के गणित के हिसाब से राज्यसभा की दो सीटों में एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय है। भाजपा की विधानसभा में 54 सीटें हैं। राज्यसभा के लिए 31 वोट होना अनिवार्य है। इस लिहाज से भाजपा के लिए एक सीट हासिल करना आसान है लेकिन दोनों सीटें जीतना मुश्किल है।
दोनों सीटों के लिए 62 वोट हासिल करना होगा। दूसरी ओर कांग्रेस की विधानसभा में 35 सीटें होने के कारण एक सीट जीतना मुश्किल नहीं होगा। गौरतलब है कि अप्रैल में राज्यसभा सदस्य केटीएस तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
ओबीसी को साधने की रणनीति लक्ष्मी वर्मा कुर्मी ओबीसी समाज से आती हैं। छत्तीसगढ़ और खासकर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र में कुर्मी समाज का अच्छा प्रभाव है। लक्ष्मी वर्मा के जरिये भाजपा ओबीसी समाज में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। इसके अलावा लक्ष्मी वर्मा के जरिये राज्यसभा में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने का भी प्रयास है। लक्ष्मी वर्मा लंबे समय से महिला मोर्चा और संगठन में सक्रिय रही हैं।
आदिवासी वोट बैंक पर नजर आदिवासी प्रतिनिधित्व बनाए रखने की रणनीति फूलो देवी नेताम आदिवासी समाज से आती हैं। छत्तीसगढ़ में आदिवासी आबादी बड़ा वोट बैंक है, इसलिए कांग्रेस एसटी प्रतिनिधित्व बनाए रखना चाहती है। इसके अलावा एक दूसरी बड़ी वजह बस्तर में संतुलन बनाए रखना है। फूलो देवी बस्तर क्षेत्र से हैं। कांग्रेस बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत रखना चाहती है। इसलिए उन्हें रिपीट किया गया है।