
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने दुर्ग स्टेशन रोड स्थित कर्नाटक बैंक की शाखा में चल रहे 111 बैंक खातों की जांच शुरू की।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इन खातों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से ठगी गई रकम को जमा करने और निकालने के लिए किया जा रहा था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इन खातों में अब तक कुल 86,33,247 रुपए का अवैध लेनदेन हुआ है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
साइबर ठग अक्सर ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं, जो थोड़े से पैसों के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड और पासबुक उन्हें इस्तेमाल करने के लिए दे दें। इन खातों को तकनीकी भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
दुर्ग में पकड़े गए इन 10 आरोपियों ने भी आर्थिक लाभ के लालच में अपने खाते ठगों को उपलब्ध कराए थे।
इन लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें 24 साल के युवक से लेकर 56 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों के नाम मधु साहू (45), ज्योति गौतम (28), फरहद खान (56), भूपेश गोहिल (51), अजय कुमार उर्फ मोनू (29), मसीर आलम (27), नवीन भागवत (24), भूपेंद्र कुमार टंडन (36), संतोष बिसाई (28) और हीरा सिंह (55) हैं।
पुलिस ने इनके पास से बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए हैं। फिलहाल सभी 10 आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
नेटवर्क में जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी
दुर्ग पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद लोगों से अपील की है कि अपना बैंक खाता, ओटीपी या पासबुक किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें। कई बार साइबर ठग कमीशन का लालच देकर लोगों को फंसाते हैं, लेकिन जांच में खाताधारक भी उतने ही दोषी पाए जाते हैं।