
रविवार को पुलिस ने आरोपी के पास से हाई क्वालिटी का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। साथ ही इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
जांच के दौरान पुलिस ने हाइड्रोपोनिक गांजा से जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ शुरू की। इसके बाद 5 अप्रैल को एक और आरोपी आयुष विश्वकर्मा को चिन्हित कर एमआईजी क्षेत्र, हुड़को भिलाई से गिरफ्तार किया गया।
आरोपी के कब्जे से हाइड्रोपोनिक तरीके से उगाया गया 1.4 ग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है। आरोपी आयुष विश्वकर्मा (29), एमआईजी 01/982 हुड़को भिलाई का निवासी है।
उसे विधिवत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
एक दिन पहले दो आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, 4 अप्रैल को बोरसी रोड स्थित बीज विकास निगम, रुआबांधा भिलाई क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए विक्रम साहू और यश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया गया था।
दोनों के पास से गांजा, हाइड्रोपोनिक गांजा और नशा करने का अन्य सामान बरामद किया गया। इस मामले में थाना भिलाई नगर में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(ख), 27(ए) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हाइड्रोपोनिक गांजा कहां से लाया जा रहा था और इस कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
कौन कर रहा था खेती, पुलिस जुटा रही जानकारी
पुलिस ने बताया कि हाइड्रोपोनिक गांजा सामान्य गांजे की तुलना में अधिक असरदार माना जाता है और इसे विशेष तकनीक से उगाया जाता है।
छत्तीसगढ़ में इस तरह के हाई क्वालिटी हाइड्रोपोनिक गांजे का यह पहला मामला बताया जा रहा है। इसी वजह से पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए गहन जांच कर रही है।
पुलिस पूरे रैकेट तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाइड्रोपोनिक गांजा की खेती कौन कर रहा था और इसकी सप्लाई किन-किन स्थानों पर की जा रही थी।
जानिए क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा ?
यह गांजा मिट्टी के बिना सिर्फ पानी और खास पोषक तत्वों की मदद से लैब या बंद कमरों में उगाया जाता है। यह आम गांजे के मुकाबले कई गुना ज्यादा नशीला और महंगा होता है। हाइड्रोपोनिक्स में जड़ों को सीधे खनिज युक्त पानी में रखा जाता है।
इसमें मिट्टी की जगह कोको कॉयर, रॉकवूल या पेर्लाइट जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है, जो केवल जड़ों को सहारा देते हैं, पोषण नहीं। इसे उगाने के लिए एक इंडोर सेटअप की आवश्यकता होती है। इसके लिए एक बड़ा टैंक जिसमें पानी और पोषक तत्व भरे होते हैं।
मिट्टी की कमी और बंद कमरे में होने के कारण शक्तिशाली LED या HPS लाइट का इस्तेमाल किया जाता है, जो सूर्य के प्रकाश की कमी को पूरा करती हैं। पानी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे रसायनों का सटीक मिश्रण मिलाया जाता है।
पानी में एयर पंप के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है ताकि जड़ें सड़ें नहीं। मिट्टी न होने से कीड़े और बीमारियों का खतरा कम रहता है। बिजली का भारी बिल, महंगे उपकरण और विशेष पोषक तत्वों के कारण इसे उगाने का खर्च बहुत ज्यादा आता है।