
अदालत ने मीराबाई पर 2000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने पैरवी की।
यह घटना सितंबर 2012 की है। मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम पंडरी निवासी मीराबाई के पति श्रवण सिंह और संजय सिंह के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते मीराबाई ने संजय को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
मीरा बाई ने सेवक सिंह से संपर्क किया और संजय सिंह की हत्या के लिए 30,000 रुपए देने की बात कही। उसने मौके पर ही 29,000 रुपए एडवांस भी दिए। सेवक सिंह ने अपने साथ बबलू और भोलू को भी इस काम में शामिल किया।
प्लानिंग के तहत, 8 सितंबर 2012 को तीनों ने मिलकर संजय सिंह की हत्या कर दी और शव को ग्राम ऐठी के डबरी तालाब में फेंक दिया ताकि पहचान न हो सके।
कुछ दिनों बाद तालाब में शव मिला। संजय के भाई ने उसके कपड़ों से उसकी पहचान की। पुलिस जांच में सेवक सिंह ने सच बता दिया और पूरा मामला सामने आ गया।
यह केस कई सालों तक चला। अदालत में गवाहों ने बताया कि जमीन विवाद के कारण ही यह हत्या करवाई गई थी।
तीनों आरोपियों को पहले ही मिल चुकी सजा
पुलिस जांच में सामने आया था कि इस हत्याकांड को सेवका सिंह, बबलू उर्फ जगनारायण और भोलू उर्फ भोला गोंड ने अंजाम दिया था। इन तीनों सुपारी किलर आरोपियों को न्यायालय द्वारा पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। मुख्य साजिशकर्ता मीराबाई के खिलाफ मामला विचाराधीन था, जिस पर अब अंतिम निर्णय आया है।
केस में महिला को उम्रकैद की सजा
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि मीराबाई ने पूर्ण आशय और जानकारी के साथ हत्या के लिए उकसाया था। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने महिला को उम्रकैद की सजा सुनाई।