छत्तीसगढ़ विधानसभा में शासकीय संकल्प विपक्ष की गैरमौजूदगी में पारित किया गया। 33% महिला आरक्षण पर करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक चर्चा हुई। सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच कई बार तीखी नोंक-झोंक भी हुई। इस बीच विपक्ष ने सदन का बहिष्कार कर दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि आगामी मानसून सत्र जुलाई के दूसरे सप्ताह में संभावित है। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
सदन में परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई। विपक्ष ने कहा कि सदन के बाहर निंदा प्रस्ताव की बात कही गई थी, अब शासकीय संकल्प लाकर चर्चा कर रहे हैं। विपक्ष का कहना था कि जनगणना के बाद महिला आरक्षण लागू किया जाए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्र सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लेकर आई, लेकिन विपक्ष ने परिसीमन और जनगणना के मुद्दे को लेकर इसका विरोध किया, जो समझ से परे है। उन्होंने कहा कि परिसीमन होने से क्षेत्र बढ़ते और ज्यादा लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका मिलता।महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर इसे जल्द लागू करने के संकल्प के साथ काम कर रही है। महिलाओं को आरक्षण देना विपक्ष को रास नहीं आया, इसलिए हर बार बिल का विरोध किया गया।
भाजपा की पुरुषवादी मानसिकता पर चोट पड़ती- महंत
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि भाजपा की पुरुषवादी और मनुवादी सोच महिलाओं को बराबरी का अधिकार नहीं देना चाहती। अगर 850 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होता तो महिलाओं को करीब 280 सीटें मिलतीं, जबकि पुरुषों के पास 570 सीटें रहतीं। इससे पुरुषवादी मानसिकता पर चोट पड़ती, इसलिए महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया।
चर्चा के बीच कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि आरक्षण बिल चुनावी झुनझुना है, हमारे देश की महिलाएं जानती हैं कि 2023 में बिल पास हुआ पर उसे लागू नहीं किया गया, महिलाओं को अपने अधिकार मालूम है।
सत्ता पक्ष से डिप्टी सीएम साव ने तंज करते हुए कहा कि, कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में 500 रुपए देने का वादा किया था, आज किस मुंह से ये महिला के अधिकारों की बात कर रहे हैं।
जनता कभी माफ नहीं करेगी- सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लेकर आई, लेकिन विपक्ष ने परिसीमन और जनगणना के मुद्दे को लेकर इसका विरोध किया, जो समझ से परे है। उन्होंने कहा कि परिसीमन होने से क्षेत्र बढ़ते और ज्यादा लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका मिलता।
खुद का उदाहरण देते हुए साय ने कहा कि वे रायगढ़ से चार बार सांसद रहे हैं और वहां का क्षेत्र करीब 350 किलोमीटर तक फैला है, ऐसे में एक सांसद चाहकर भी हर जगह नहीं पहुंच सकता। परिसीमन से क्षेत्र बंटता, विकास बढ़ता और लोगों तक जनप्रतिनिधियों की पहुंच आसान होती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर अपनी बात सरलता से रखी और यहां तक कहा कि इसका श्रेय विपक्ष लेना चाहे तो ले सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सिर्फ विरोध के लिए विरोध किया, जिसे देश और प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।