
जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में हुए बड़े घोटाले का खुलासा करीब एक साल पहले हुआ था। बैंक के तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी और सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने कुसमी और शंकरगढ़ शाखाओं के खातों की जांच करवाई थी। जांच में करीब 28 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई थी।
इस मामले में बैंक मैनेजर समेत 12 अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।
तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के घोटालों की जांच ईडी या सीबीआई से कराने की अनुशंसा करते हुए प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था। राज्य शासन ने जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को पत्र भेजा था। प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के लिए मंजूरी दे दी है।
सहकारी बैंक के CEO श्रीकांत चंद्राकर ने बताया कि ED की टीम सरगुजा नहीं आई है। उनका पत्र आया था और घोटाले की जांच से संबंधित सभी रिपोर्ट मांगी गई थी। सरगुजा से जांच रिपोर्ट ED को शनिवार को भेज दी गई है। ED मामले में जो अन्य जानकारी मांगेगी, भेजा जाएगा।
अब तक 28 करोड़ का घोटाला उजागर
सहकारी बैंक के कुसमी और शंकरगढ़ ब्रांच के बैंक के खातों की साल 2012 से 2024 तक की ऑडिट में 28 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था।
घोटाले के मुख्य आरोपी शंकरगढ़ शाखा के प्रबंधक अशोक कुमार सोनी करीब 10 साल तक अलग-अलग शाखाओं में पदस्थ रहे। उन्होंने बैंक में फर्जी खाते खोले और समितियों के खातों के साथ-साथ इन फर्जी खातों से भी बड़ी रकम की हेराफेरी की। बैंक खातों से नकद पैसे निकाले गए और कई बार ऑनलाइन ट्रांसफर भी किया गया।
आदिम जाति सहकारी समिति जमड़ी का बैंक अकाउंट बिना किसी दस्तावेज खोला गया। इसमें 19 करोड़ 24 लाख रुपए जमा किए गए और इस खाते से 19 करोड़ 22 लाख 73 हजार रुपए का आहरण किया गया। यह राशि किसानों के खाते, पंचायतों के खातों से ट्रांसफर कर जमा की गई थी।