
हालत यह है कि, कई दुकानों में ब्रांड स्टॉक की कमी है। डिस्टिलर्स-बॉटल सप्लाई लॉबी शराब सप्लाई में रुकावट पैदा कर रही है। कैबिनेट में निर्णय होने के बावजूद लॉबी की मनमानी को छुपाने के लिए आबकारी अफसर प्लास्टिक बोतलों में शराब सप्लाई के तिथियों को लगातार बढ़ा रहे हैं।
पूरे मामले में आबकारी अधिकारियों ने सप्लाई व्यवस्था पर मॉनिटरिंग करने की बात कही है। आयुक्त के अनुसार, अधीनस्थ अधिकारियों समेत सप्लायरों को बैठक लेकर निर्देश दिए है। 31 मई के बाद पूरी सप्लाई शुरू नहीं हो
दो बार जारी हुआ अलग-अलग आदेश
छत्तीसगढ़ की करीब 800 शराब दुकानों तक सप्लाई करने वाली डिस्टिलरियों में 1 अप्रैल से पीईटी प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग का आदेश लागू किया गया था। अचानक लागू हुए फैसले से डिस्टिलर्स और बॉटल सप्लायर लॉबी में हड़कंप मच गया।
कांच की बोतलों में बॉटलिंग करने वाले कई कारोबारी कोर्ट पहुंच गए। वहीं बड़े पैमाने पर प्लास्टिक बोतलों की व्यवस्था भी नहीं हो सकी। स्थिति बिगड़ने पर विभाग को 31 मई तक फिर से कांच की बोतलों में बॉटलिंग की अनुमति देनी पड़ी।
इस बीच करीब 10 दिनों तक कई डिस्टिलरियों में उत्पादन और बॉटलिंग बंद रही। पुराने स्टॉक खत्म होने के बाद अब दुकानों तक मांग के मुकाबले सप्लाई कम है।
राजस्व में आएगी कमी
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में रोजाना करीब 70 करोड़ रुपए की देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की बिक्री होती है। सप्लाई बाधित होने से सरकार को हर दिन 40 से 50 करोड़ रुपए तक के राजस्व नुकसान का अनुमान है।
प्लास्टिक बोतलों में शराब सप्लाई का निर्णय कैबिनेट ने इसलिए लिया था, ताकि शराब में मिलावट ना हो। लेकिन कारोबारियों की मनमानी के चलते आबकारी विभाग के अधिकारियों को अपना फैसला बार-बार बदलना पड़ रहा है।
अब पढ़िए आबकारी आयुक्त ने क्या कहा
आबकारी आयुक्त पदुम एल्मा ने बताया कि, लगातार डिस्टलर्स की बैठक ली जा रही है। वर्तमान में प्लास्टिक और कांच बोतल दोनों में सप्लाई जारी है। 15 मई से प्लास्टिक बोतलों में सप्लाई की एक्सरसाइज डिस्टलर्स करेंगे, कई लोगों ने रिफलिंग पट्टा भी बदलवा लिया है। 31 मई को बाद जो डिस्टलर्स सप्लाई में लापरवाही बरतेगा, उसका लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा।