
इसके साथ ही उनका मानदेय भी कई महीनों से अटका पड़ा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने सामूहिक रूप से यह कदम उठाया। ये सभी सरपंच पिछले 18 मई से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए थे।
अंतागढ़ ब्लॉक के सरंपच संघ के अध्यक्ष ने कहा, अभी हम सब मिलकर सामूहिक इस्तीफा दे रहे हैं। अगर इसके बाद भी हमारी बात नहीं मानी गई, तो आगे चक्काजाम करने की भी तैयारी है।
वहीं, कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर ने हालांकि इस सामूहिक इस्तीफे को नियमों के विरुद्ध बताया है। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी फंड के मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए थे।
अब जानिए पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, अंतागढ़ ब्लॉक के सभी 56 ग्राम पंचायतों के सरपंच 18 मई से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए थे। सरपंचों का कहना है कि पंचायतों को विकास कामों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है। साथ ही उनका मानदेय भी कई महीनों से अटका पड़ा है। फंड की कमी की वजह से गांवों में विकास के कई काम ठप हो गए हैं।
सरपंचों का कहना है कि गांव के लोग उनसे सड़क, नाली, पीने के पानी और सफाई जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन पंचायतों के खातों में पैसा नहीं होने की वजह से वे अपने चुनावी वादे पूरे नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि बिना फंड और संसाधनों के गांवों का विकास करना मुश्किल हो गया है।
सरपंच संघ ने आरोप लगाया है कि पंचायतों को लंबे समय से पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है, जिसके कारण अधिकांश विकास कार्य अधूरे पड़े हैं।