
जिसके चलते परिजनों को पिकअप में शव रखकर गांव ले जाना पड़ा। अस्पताल परिसर से सामने आई यह तस्वीर न केवल एक परिवार की परेशानी को दिखाती है, बल्कि उन दावों की हकीकत भी बयां करती है, जो अंतिम संस्कार तक सम्मानजनक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किए जाते हैं।
परिजनों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम के बाद काफी देर तक शव वाहन का इंतजार किया गया, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। इसलिए मजबूरी में मालवाहक वाहन का सहारा लेना पड़ा। वहीं, CMHO डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि, मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन परिजन निजी वाहन से ले गए।
डॉक्टर बोले अपनी सुविधा के हिसाब से ले जाओ- स्थानीय
स्थानीय निवासी कौशल साहू ने बताया कि, आप लोग देख ही रहे हैं डेड बॉडी को खुली गाड़ी में लेकर जाना पड़ रहा है। हमको बहुत तकलीफ़ हो रही है, मुक्तांजलि वाहन अस्पताल ने दिया नहीं और डॉक्टरों ने कहा कि, अपनी सुविधा के हिसाब से ले जाओ।
विक्की जंघेल ने कहा कि, खैरागढ़ जिले में कई बड़े सरकारी हॉस्पिटल है, लेकिन एक सरकारी गाड़ी उपलब्ध नहीं है। जिससे परेशानी होती है। यह दुख की बात है।
इससे पहले भाई-बहन का शव कबाड़ वाहन से ले गए थे
जिले में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले झूरानदी में दो भाई-बहन की हत्या के बाद उनके शवों को कबाड़ वाहन से गांव ले जाया गया था। वहीं, मोगरा के एक बच्चे की ट्रेन में मौत होने पर परिजनों को राजनांदगांव से बस में शव लेकर खैरागढ़ आना पड़ा था।
मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन परिजन निजी वाहन से ले गए-CMHO
इस मामले में CMHO डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि, कल शाम एक शव पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल छुईखदान लाया गया था। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को गांव तक पहुंचाने के लिए मुक्तांजलि वाहन खैरागढ़ से भेजी जा रही थी।
इसी दौरान परिजनों ने समय की आवश्यकता को देखते हुए निजी वाहन की व्यवस्था कर शव को अपने गांव ले जाने का निर्णय लिया। विभाग की ओर से मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी थी और वाहन भेजी जा रही थी।