काव्य कुंभ के आखिरी दिन रविवार को शायरी, कविता और लोक संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला

Chhattisgarh Crimesकाव्य कुंभ के आखिरी दिन रविवार को शायरी, कविता और लोक संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। डूंडा स्थित स्कूल परिसर में आयोजित ‘संगम’ सत्र में देश के चर्चित शायरों और कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से शुरू हुआ। दर्शकों के चेहरों पर इंतजार की थकान साफ नजर आ रही थी, लेकिन जैसे ही मंच पर मशहूर शायर वसीम बरेलवी पहुंचे, माहौल पूरी तरह बदल गया। तालियों की गड़गड़ाहट और “वाह-वाह” की गूंज के बीच मुशायरा और कवि सम्मेलन का दौर शुरू हुआ।

उर्दू शायरी के दिग्गज वसीम बरेलवी, लोकप्रिय शायर जुबैर अली ताबिश, कवयित्री मनिका दुबे और मीर अली मीर ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। देर रात तक लोग अपनी सीटों पर जमे रहे और प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।

इस दौरान वसीम बरेलवी ने कहा, “अच्छे लोग मेरी कमजोरी भी हैं और मेरी ताकत भी।” वहीं, प्रसिद्ध लोक गायक मामे खान ने अपने चर्चित गीत ‘चौधरी’ से समां बांध दिया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शक जमकर थिरकते नजर आए।

वसीम बरेलवी ने शेर पढ़ने से पहले कहा क अगर जीवन को उस तरह से जीना है, जैसे सदियों से हिंदुस्तान में जिया जाता रहा है, तो जीवन में संतुलन होना चाहिए। संतुलन के लिए साहित्य से रिश्ता जुड़ना जरूरी है, जब तक साहित्य से रिश्ता नहीं जुड़ेगा, तब तक जीवन और समाज में संतुलित नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा कि अच्छे लोग मेरी कमजोरी हैं। यही कमजोरी मेरी ताकत भी है। जिंदगी अधूरी रह जाती है अगर आपसे मुलाकात नहीं होती, मगर मेरी यह मजबूरी है कि मैं किसी भी मुशायरे में एक घंटे से ज्यादा नहीं बैठ पाता हूं। फिर भी कोशिश करूंगा कि आपकी भावनाओं का सम्मान हो। अगर कुछ कमी रह जाए तो मुझे माफ कीजिएगा। यह मेरी सेहत की वजह होगी, लेकिन मेरी तरफ से कोई कमी

वसीम बरेलवी ने ये शायरी गजल पढ़ी

लगता तो बेखरर-सा हूं, लेकिन खबर में हूं, तेरी नजर में हूं तो मैं सबकी नजर में हूं।”

“उदास एक मुझी को तो कर नहीं जाता, वो मुझसे रूठ के अपने भी घर नहीं जाता।

वो दिन गए कि मोहब्बत थी जान की बाज़ी, किसी से अब कोई बिछड़े तो मर नहीं जाता।”

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