
इसी उद्देश्य से रायगढ़ में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेशभर के 78 वन अधिकारी और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण में हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान और संरक्षण उपायों पर फोकस किया गया।
प्रदेश में 450 हाथी, बढ़ रही चुनौती
वन विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ में इस समय करीब 450 हाथी विचरण कर रहे हैं। खासकर रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जिलों में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौत के सही कारणों की पहचान होने से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।