
नावापारा के ग्रामीणों ने बताया कि साल 1991-92 में हुए बंदोबस्त त्रुटि सुधार कार्य के दौरान कई गड़बड़ियां हुई थीं। इसका असर आज भी गांव के लोगों को झेलना पड़ रहा है। गांव के कई किसान 50 से 80 साल से अपनी जमीन पर रह रहे हैं और खेती कर रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड में हुई गलतियों के कारण उनकी जमीनों पर विवाद खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि रिकॉर्ड की गड़बड़ियों का फायदा उठाकर कुछ भूमि माफिया और फर्जी किसानों ने कई जमीनों की खरीद-बिक्री कर दी। आरोप है कि इन लोगों ने सरकारी जमीनों को भी नहीं छोड़ा और साल 1954 में बने प्राथमिक शाला खासपारा की शासकीय भूमि तक बेच डाली।
मामले से नाराज सैकड़ों ग्रामीण मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
जमीन बिक्री पर रोक लगाने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक बंदोबस्त रिकॉर्ड की सभी त्रुटियों को ठीक नहीं किया जाता, तब तक ग्रामसभा की अनुमति के बिना गांव की किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जाए।
उनका कहना है कि इससे किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी और आगे होने वाले फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।सूरजपुर जिले में बंदोबस्त त्रुटि सुधार न होने से भूमि माफियाओं द्वारा ग्रामीणों की जमीनें फर्जी तरीके से बेचे जाने का मामला सामने आया है। इन माफियाओं ने 50 साल से अधिक पुराने एक प्राथमिक शाला की भूमि को भी बेच दिया है। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण आज कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।यह पूरा मामला प्रेमनगर क्षेत्र के नावापारा गांव का है। वर्ष 1991-92 के दौरान हुए बंदोबस्त त्रुटि सुधार कार्य में हुई गड़बड़ी का खामियाजा पूरा गांव भुगत रहा है। यहां 50 से 80 साल से काबिज किसान अपनी जमीन पर रहते और खेती करते आ रहे हैं।बंदोबस्त त्रुटि में हुई इसी गड़बड़ी का फायदा उठाकर भूमि माफिया और अवैध फर्जी किसानों ने कई जमीनों को बेच दिया है। इन भूमि माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने वर्ष 1954 में बने प्राथमिक शाला खासपारा की शासकीय भूमि को भी बेच डाला है।इस घटनाक्रम से खुद को ठगा महसूस कर रहे किसान और ग्रामीण आज कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जब तक रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किए जाते, तब तक ग्रामसभा की अनुमति के बिना जमीन की बिक्री पर रोक लगाई जाए।