
यह बैठक नगर निगम में विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। बैठक शुरू होने से पहले ही नेता प्रतिपक्ष गायत्री बिरहा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पार्षदों ने सभाकक्ष के भीतर, निगम कार्यालय परिसर और मुख्य द्वार पर बैठकर नारेबाजी की तथा अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
नेता प्रतिपक्ष गायत्री बिरहा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने सभाकक्ष के भीतर, निगम कार्यालय परिसर और मुख्य द्वार पर धरना देते हुए नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को बैठक में उचित स्थान और सम्मान नहीं दिया गया। इसे लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी बताते हुए उन्होंने विरोध दर्ज कराया।
“समीक्षा के लिए काम ही नहीं हुआ”
कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर सरकार के एक वर्ष से अधिक के कार्यकाल में ऐसा कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं हुआ है जिसकी समीक्षा की जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा भी उठा
विरोध के दौरान कांग्रेस नेताओं ने निगम कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उनका कहना था कि निगम के कई कर्मचारियों को पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पार्षदों ने प्रशासन पर इस गंभीर समस्या की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
पुलिस बल बुलाना पड़ा
प्रदर्शन के कारण निगम कार्यालय में लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस बल को भी मौके पर बुलाया गया।
प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और हटने से इनकार कर दिया। इसके चलते बैठक की कार्यवाही शुरू ही नहीं हो सकी।
मंत्री और अधिकारी बिना बैठक किए लौटे
काफी देर तक चले गतिरोध के बाद स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर और अन्य अधिकारी समीक्षा बैठक किए बिना ही निगम कार्यालय से रवाना हो गए। इसके साथ ही प्रस्तावित बैठक स्थगित कर दी गई।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- पार्षदों से संवाद के लिए बुलाई थी बैठक
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि लंबे समय से निगम के पार्षदों के साथ बैठक नहीं हो पाई थी। इसी उद्देश्य से समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी ताकि विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की जा सके।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्षदों के विरोध के कारण बैठक आयोजित नहीं हो सकी।
दिनभर चर्चा में रहा घटनाक्रम
नगर निगम परिसर में हुए इस राजनीतिक टकराव की चर्चा दिनभर शहर में होती रही। समीक्षा बैठक रद्द होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि निगम की अगली बैठक कब और किन परिस्थितियों में आयोजित की जाएगी।