
शुरुआत में लोगों को पैसे भी मिले। लेकिन कुछ दिन बाद रुपए मिलने बंद हो गए। तब लोगों को ठगी का एहसास हुआ। जांच में पता चला कि ठगों ने निवेशकों के नाम से ही कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा दिया। इसके अलावा निवेशकों को ही कंपनी का डायरेक्टर भी बना दिया था।
बाद में कंपनी ने अपनी वेबसाइट बंद कर दी है। मामला पत्थलगांव थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने कथित डायरेक्टर मोहम्मद सिराज आलम और उसके दो सहयोगियों इमरान खान, संतोष कुमार साव को झारखंड के बोकारो और रांची से गिरफ्तार किया है। मामले में दो आरोपी पहले ही अरेस्ट हो चुके हैं।
कैसे हुआ ठगी का भंडाफोड़ ?
दरअसल, पत्थलगांव के रहने वाले जागेश्वर लाल यादव ने 17 अक्टूबर को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि साल 2023 में एक कंपनी के प्रतिनिधि ने होटल मान्या में बैठक आयोजित कर निवेश का झांसा दिया था।
आरोपी संतोष कुमार साहू ने खुद को “सी बुल्स ग्लोबल सॉल्यूशन कंपनी” का प्रतिनिधि बताया। दावा किया कि कंपनी एक कृषि प्रोडक्ट आधारित प्लांट स्थापित कर रही है, जिसमें निवेश करने पर रोज 1% ब्याज मिलेगा।
बाद में कथित एमडी सिराज आलम ने खुद को ट्रेडिंग कंपनी का संचालक बताते हुए कहा कि कंपनी सेबी में रजिस्टर्ड है और रोजाना 1% का मुनाफा और 10 महीने में रकम तीन गुना लौटाई जाएगी। भरोसा दिलाने के लिए बैंक चेक तक दिए गए।
शुरुआती महीनों में दिया गया ब्याज
शुरुआती महीनों में ब्याज मिलने के कारण ग्रामीणों का विश्वास बढ़ता गया और उन्होंने निवेश कर दिया। लेकिन कुछ समय बाद ब्याज मिलना बंद हो गया। जब निवेशकों ने पूछताछ की, तो उन्हें कंपनी के एमडी मोहम्मद सिराज आलम से मिलवाया गया।
जिसने उन्हें नए झांसे में फंसाते हुए कहा कि कंपनी “एग्रीकल्चर बेस” नहीं बल्कि “ट्रेडिंग कंपनी” है और सेबी में रजिस्टर्ड है। शुरुआती कुछ महीनों तक इस स्कीम के तहत निवेशकों को उनके ही पैसे से ब्याज दिया गया, जिससे लोगों का विश्वास और बढ़ा।
लेकिन जैसे ही नए निवेशक जुड़ना बंद हुए, कंपनी ने ब्याज देना बंद कर दिया और वेबसाइट भी बंद कर दी। इसके बाद कंपनी के सभी पदाधिकारी फरार हो गए।
ठगी का नेटवर्क और तरीका
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने कोरबा, चांपा, अंबिकापुर, बिलासपुर समेत कई जिलों में मीटिंग कर ग्रामीणों को निवेश के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गारंटी के तौर पर बैंक चेक दिए और सेबी में रजिस्टर्ड होने का झूठा दावा किया।
निवेशकों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर भी लिए गए, जिन्हें बाद में एक नई कंपनी “सी बुल्स सहयोग निधि रियल एस्टेट एंड फाइनेंस लिमिटेड” के डायरेक्टर बनाकर इस्तेमाल किया गया, ताकि कानूनी जिम्मेदारी से आरोपी बच सकें।
इसी झांसे में शिकायतकर्ता जागेश्वर यादव ने 1.80 करोड़ रुपए, साथी लक्ष्मण केशवानी ने 95 लाख, कमलेश यादव ने 10 लाख, भूषण पटेल ने 33 लाख, डॉ. पीताम्बर साय ने 25 लाख और राजेश देवांगन ने 15 लाख रुपए निवेश किए।
रकम वापसी की मांग पर बदला ठगों का पैंतरा
निवेश के बाद जब निवेशकों ने रकम वापस मांगी तो ठगों ने दूसरी चाल चली। साल 2024 में ओडिशा के सुंदरगढ़ में ठगों ने मीटिंग बुलाई। उसके बाद हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के नाम पर निवेशकों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर ले लिए।
बाद में कंपनी ने अपनी वेबसाइट बंद कर दी है। जब सी बुल्स ग्लोबल सॉल्यूशन कंपनी के डायरेक्टर, अन्य सदस्यों से संपर्क किया गया, तो आरोपी नुकसान का बहाना बनाकर पैसे लौटाने से बचते रहे।
पहले जांजगीर-चांपा और सक्ती में दबिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने 20 नवंबर को जांजगीर-चांपा और सक्ती में दबिश दी। जहां से हरिशरण देवांगन और संतोष कुमार साहू को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। जबकि बाकी आरोपी फरार हो गए।
सूचना पर झारखंड में छापामार कार्रवाई
पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश देती रही। गुरुवार को सूचना मिली कि कथित एमडी मोहम्मद सिराज आलम बोकारो में है, जबकि उसके सहयोगी इमरान खान और संतोष कुमार साव रांची में छिपे हैं।
इसके बाद पुलिस टीम झारखंड रवाना हुई और सटीक लोकेशन ट्रैकिंग के बाद तीनों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म स्वीकार किया। आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 120(B) और 34 के तहत केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
कंपनी निवेशकों को नहीं देती थी ब्याज
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल, लैपटॉप, बैंक डिटेल, आधार कार्ड और पैन कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारम्भिक जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी निवेशकों को ब्याज नहीं देती थी, बल्कि नए निवेशक की रकम से पुराने निवेशक को भुगतान किया जाता था
आर्थिक अपराधों के खिलाफ जारी रहेगी कार्रवाई
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि पत्थलगांव थाना क्षेत्र में दर्ज 6 करोड़ की ठगी के मामले में फरार तीन आरोपियों को जशपुर पुलिस ने झारखंड से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।मामले की जांच जारी है। आर्थिक अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
छत्तीसगढ़ की जशपुर पुलिस ने करोड़ों की ठगी के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। ‘सी बुल्स ग्लोबल सॉल्यूशन’ नामक फर्जी कंपनी चलाकर ग्रामीणों से 6 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस ऑपरेशन को ‘अंकुश’ नाम दिया गया था।
पुलिस टीम ने कंपनी के कथित डायरेक्टर मोहम्मद सिराज आलम और उसके दो सहयोगियों इमरान खान एवं संतोष कुमार साव को झारखंड के बोकारो और रांची से गिरफ्तार किया है। आरोपी घटना के बाद से लगातार फरार चल रहे थे, जिनकी तलाश पुलिस कई महीनों से कर रही थी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी ने बताया कि यह मामला पत्थलगांव क्षेत्र के मदनपुर इंजिको निवासी जागेश्वर लाल यादव की शिकायत पर सामने आया। खेती-बाड़ी और ठेकेदारी का काम करने वाले जागेश्वर लाल यादव ने 17 अक्टूबर 2023 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्ष 2023 में पत्थलगांव के होटल मान्या में कृषि प्रोडक्ट और निवेश को लेकर एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में वह और उनके साथी डॉ. पीताम्बर साय निराला, सुकुंद चौहान और राजेंद्र भगत, संतोष कुमार साव के संपर्क में आए थे। संतोष ने उन्हें निवेश पर हर महीने भारी लाभ मिलने का लालच देकर कंपनी में पैसा लगाने के लिए उकसाया।
इसके बाद कथित कंपनी के एमडी मोहम्मद सिराज आलम ने खुद को ट्रेडिंग कंपनी का संचालक बताया। उसने दावा किया कि कंपनी सेबी में रजिस्टर्ड है और पिछले 12 वर्षों से ट्रेडिंग कर रही है। सिराज ने ग्रामीणों को प्रतिदिन 1 प्रतिशत लाभ और 10 महीनों में निवेश की रकम तीन गुना होने का भरोसा दिलाया।