
किशन सिन्हा/छुरा
छुरा। मौसम की मार से इस वक्त पूरा छत्तीसगढ़ बदहाल हुए जा रहा है मई के महीने मे कहीं धूप कहीं छांव तो कहीं आंधी तूफान जलवायु की अनिश्चितता सभी को परेशान कर रही है, हालत यह है की न दिन में चैंन ना रात मैं सुकून वैसे तो हमारे देश और प्रदेश को जल वायु में विविधता के नाम से जाना जाता है जिसमें वर्षा शीत और गृष्म काल का समय कुछ हद तक निर्धारित होता है यह मान कर चलते हैं। जिसमें मार्च से जून तक के महीने को गर्मी का मौसम समझा जाता रहा है जिसमें गर्मी का एहसास किसी रेलवे स्टेशन से छूटते रेल के इंजन की तरह निम्न से उच्च की ओर महसूस होता है जिससे जीव-जगत को मौसम के संग संतुलन बिठाने में सहजता महसूस होती है। किंतु इस बार का ग्रीष्म काल अटपटा नजर आ रहा है। गर्मी में ही बरसात और ठंडी का अहसास लोगों को मौसम के संग एकाएक संतुलन बिठाने में असमर्थ करता जा रहा है। इस स्थिति में लोग जादा-तर समय या तो घर में रहना सही समझ रहें हैं या कम गर्म स्थानों पर। लेकिन कुछ विशेष वर्ग के लोगों के लिए मौसम जैसा भी हो उन्हें अपना दायित्व हर हाल में पुरा करना होता है इस विशेष वर्ग में सबसे पहला नाम हम पुलिस प्रशासन का ले सकते हैं जो चौबीसों घंटे आम जनता की सेवा में तत्पर रहते हैं जनता की सेवा और सुरक्षा के बिच अपनी सेहत का ध्यान रखने हेतु छुरा नगर के थाना में पुलिस विभाग के जवान तथा सी ए एफ बटालियन के समस्त प्रहरी योग का सहारा ले रहे हैं। थाना परिसर में समय समय-समय पर राज्य के प्रतिष्ठित योगाचार्य मिथलेश कुमार सिन्हा द्वारा योग शिविर का आयोजन कर सभी को योगाभ्यास कराया जा रहा है। जिसमे सूक्ष्म व्यायाम का विज्ञान समझाते हुए अभ्यास कराया, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि एवम फेफड़ों की क्रिया।
ग्रीष्म काल विशेष – शीलता बढ़ाने हेतु भस्त्रिका प्राणायाम, पाचन तंत्र की मजबूती तथा मधुमेह आदि बीमारियों से बचाव हेतु, कपालभाती प्राणायाम, मस्तिष्क की क्रिया शीलता बढ़ाने एवम मस्तिष्क संबंधी रोगों हेतु भ्रामरी प्राणायाम,
गर्मी से बचने हेतु शीतली प्राणायाम, शीतकारी प्राणायाम तथा लू से बचने हेतु बेल का शरबत उपयोग करने की सलाह दी। एवम हमें नीबु पानी , गन्ने का रस आदि पारंपरिक पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए तथा हल्का एवम सुपाच्य भोजन करना चाहिए। एवम ठंडा पानी हेतु फ्रीज की जगह मटकी का पानी उपयोग करने बताया , क्योंकि फ्रीज के पानी से हमारी अंदरूनी तंत्र कमजोर पड़ जाता है जबकि मटकी के पानी से आयुर्वेद के अनुसार मिट्टी के घड़े या मटके का पानी अमृत के सामान होता है। मटके में पानी नेचुरल रूप से ठंडा होता है, जो हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। साथ ही, मिट्टी में ऐसे कई तत्व मौजूद होते हैं, जो कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता रखते हैं। गर्मियों में मटके का पानी पीने से शरीर की परेशानियां दूर हो सकती हैं।
लोग आजकल एल्कलाइन पानी के दीवाने हैं और एल्कलाइन पानी की मशीन या बोतलें खरीदने के लिए भारी मात्रा में खर्च करते हैं। वे कम ही जानते हैं कि मटके का पानी प्राकृतिक रूप से एल्कलाइन होता है। मिट्टी का घड़ा पानी की एसिडिक प्रकृति को कम करता है और PH को संतुलित करता है। इस योगाभ्यास के सम्बन्ध में छुरा थाना प्रभारी भूषण चन्द्राकर कहना है कि “आज के समय में हर व्यक्ति को शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने हेतु योग करना ही चाहिए क्योंकि भारत एक समय में विश्व गुरु था और उसका विश्वगुरु होने में जो सबसे बड़ा कारण रहा है वह भारत के पास का योग और आयुर्वेद। हम सभी छुरा थाना के सदस्यों को योग के बारे में वृहद ज्ञान देने हेतु मिथिलेश सिन्हा उनकी टीम का बहुत धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।”
उल्लेखनीय हैं कि छुरा नगर में विगत कई वर्षों से अलग अलग-अलग स्थानों में शिविर का आयोजन होता रहता हैं जिसमें शिविर के मुख्य योगाचार्य मिथलेश कुमार सिन्हा मार्गदर्शक यशवंत यादव जी जिला प्रभारी भारत स्वाभिमान न्यास, समाज सेवी शीतल ध्रुव की भूमिका महत्वपूर्ण है।
शिविर में थाना प्रभारी भूषण चंद्राकर, प्रधान आरक्षक- उमेश शांडिल्य ,धनुष निषाद ,आरक्षक- हरीश शांडिल्य ,अरुण कुमार, गजानंद सोनवानी, टिकेश्वर यादव, वीरेंन्द्र बंजारे ,अवध पटेल, मिथिलेश नागेश ,नरेंद्र साहू, सालिक नेताम,ललित नेताम, महिला आरक्षक -पार्वती ध्रुव एवम स्टाफ के अन्य जवान योग सीख रहे हैं।