लगभग महीने भर से जारी है हड़ताल अनिश्चितकालीन हड़ताल, राजस्व पटवारी संघ छुरा अपने आठ सुत्रीय मांगों पर अब तक है अडीग

Chhattisgarh Crimes

किशन सिन्हा/ छुरा
छुरा। लोकतंत्र में जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु शासन और प्रशासन विकास के दो पहिए माने जाते हैं जिनका आपस में सामंजस्य स्थापित होना बेहद ही अनिवार्य होता है, शासन द्वारा बनाए गए कानून को जनता तक क्रियान्वित करने का काम प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा होता है वहीं प्रशासन उसे सुचारू रूप से जनता तक पहुंचाने हेतु प्रशासनिक अधिकारियों को जनता का जिस प्रकार की भी समस्या हो उसका निराकरण करना शासन को अवगत कराने की जिम्मेदारी होती है।

इसी क्रम में जिम्मेदारियों को नजर रखते हुए राजस्व पटवारी संघ द्वारा अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर दिसंबर 2020 में अलग-अलग चरणों में आंदोलन किया गया था जिसके परिणाम स्वरूप उनके कुछ मांगों जैसे स्टेशनरी भत्ता, नेट भत्ता आदि को 2021 में स्वीकृत तो किया गया था, लेकिन आज की स्थिति में भी उन्हें धरातलीय स्तर पर क्रियान्वित नहीं किया गया। यही कारण है कि लगातार 3 सालों से करते आये मांगों को लेकर पटवारी संघ छुरा द्वारा अपने 8 सूत्रीय मांगों को साथ लिए हड़ताल पर बैठे हैं इन 8 सूत्री मांगों में – वेतन विसंगति दूर करने हेतु वेतन में बढ़ोतरी की मांग, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति, संसाधन एवं भत्ता,स्टेशनरी भत्ता, अतिरिक्त प्रभार के हल्के का भत्ता,राजस्व पटवारी भर्ती हेतु योग्यता स्नातक स्तर तक किया जावे,मुख्यालय निवास की बाध्यता समाप्त हो,बिना विभागीय जांच के एफ आई आर दर्ज ना हो, आदि इन 8 विषयों पर जोर दिया जा रहा है।

इस विषय पर पटवारी संघ छुरा के ब्लॉक अध्यक्ष झामन यादव का कहना है कि लगातार 3 वर्षों से हम अपने विभिन्न मांगों को लेकर समय-समय पर सरकार को अवगत कराते हैं लेकिन सरकार ने हमारी समस्याओं पर अब तक ध्यान नहीं दिया है अब हमने यह ठान लिया है कि जब तक हमारी समस्याओं का निराकरण न किया जाएगा तब तक हम इस भीषण गर्मी में भी आंदोलन हड़ताल जारी रखेंगे इसे यदि आम जनता व विभाग प्रभावित होता है तो उन्हें प्रभावित होने दिया जाए ताकि सरकार को भी यह पता लग सके की समस्या कितना जटिल है और इनका समाधान कितना आवश्यक है।

विदित हो कि यह हड़ताल अब लग-भग महीना भर होने को आया है आज के स्थिति में कृषक वर्ग अपने खरीब फसल के बुआई प्रारंभ करने ही वाले हैं जिसके चलते कई खाद,बीज,कागज़ी कार्यवाही हेतु किसानों को पटवारियों की आवश्यकता होती है वहीं नये शिक्षा सत्र प्रारंभ होने से पूर्व स्कूल व कालेज स्तर के बच्चे आय जाति जैसे कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए महीने भर से प्रतीक्षारत्त हैं, जबकि सरकार इनकी मांगों को पुरा करने के बजाय इस हड़ताल के खिलाफ एस्मा एक्ट लागू कर दिये है। जिससे पटवारियों में आक्रोश व्याप्त है।

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