
दंतेवाड़ा को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। यह वही जिला है जिसे दिवंगत आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा की राजनीतिक कर्मभूमि के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे में लंबे समय तक संगठन का बिना नेतृत्व चलना पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ था।
पूर्व जिला अध्यक्ष सलीम रजा के नाम की घोषणा के बाद से ही पार्टी के भीतर विरोध शुरू हो गया था। संगठन के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुलकर नाराजगी जताई थी। इसके कुछ समय बाद ही सलीम रजा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे की वजह अब तक आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हो पाई है। सलीम के इस्तीफे के बाद दंतेवाड़ा कांग्रेस बिना स्थाई नेतृत्व के चल रही थी। ऐसे में संगठन को एकजुट रखने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टी नेतृत्व पर लगातार दबाव था।
दीपक बैज के भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते हैं रिजवी
शकील मोहम्मद रिजवी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का करीबी माना जाता है। साथ ही उन्हें महेंद्र कर्मा के साथ काम करने का लंबा अनुभव भी है। संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
संगठन को साधने की बड़ी चुनौती
दंतेवाड़ा में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के भीतर मौजूद गुटबाजी को कम करना और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना होगा। आने वाले समय में पंचायत, नगरीय निकाय और अन्य राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए शकील रिजवी की नियुक्ति को संगठनात्मक संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।